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भारत का सबसे खतरनाक क्रिमिनल, जिसे पकड़ने के चक्कर में चली गई 97 पुलिसवालों की जान !

विकास दूबे (vikash dubey) के इस मामले ने कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन (veerappan) की याद ताजा कर दी जिसे पकड़ने जाने वाली पुलिस टीमों पर लगातार हमले होते थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक तौर इस अपराधी को पकड़ने में 97 पुलिस वालों शहीद हो गए थे।

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Vivhav Shukla

Jul 05, 2020

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kanpur attack on police remembered Veerappan who killed 97 police pers

नई दिल्ली। कानपुर (kanpur encounter) पुलिस ने बिकरु गांव में रहने वाले विकास दुबे (vikash dubey) एक रात में UP का मोस्ट वान्टेड गुड़ा बन गया है। विकास दुबे (vikash dubey) को गिरफ़्तार करने गई पुलिस टीम के आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इसके बाद से Up पुलिस, हर जगह विकास की तलाश कर रही है। इतना ही नहीं उसकी सूचना देने वाले को 50000 रूपए ईनाम भी देने की बात कर रही है।

विकास दूबे (vikash dubey) के इस मामले ने कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन (veerappan) की याद ताजा कर दी, जिसे पकड़ने जाने वाली पुलिस टीमों पर लगातार हमले होते थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक तौर इस अपराधी को पकड़ने में 97 पुलिस वालों शहीद हो गए थे।

पुलिस को लगने लगा था कि वीरप्पन (veerappan) को पकड़ना असंभव काम है। उसे पकड़ने के लिए सरकार ने करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए थे लेकिन उसे पकड़ नहीं पाई। इसके बाद 18 अक्टूबर 2004 को वीरप्पन एक पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। इस खूखार का एनकाउंटर करने वाले अफसर थे IPS विजय कुमार।

10 साल की उम्र में किया पहला कत्ल

कहा जाता है की 1962 में वीरप्पन (veerappan) ने 10 साल की उम्र में एक तस्कर का कत्ल कर दिया। ये उसका पहला अपराध था। उसी वक्त उसने फॉरेस्ट विभाग के भी तीन अफसरों को मार। उसके गांव वाले कहते हैं कि फॉरेस्ट विभाग के लोगों ने ही उसे स्मगलिंग के लिए उकसाया था उसके बाद ही उनका वीरैय्या, वीरप्पन बना था।

इस घटना के बाद वीरप्पन (veerappan) जंगल में भाग गया और यहीं से उसकी नई कहानी शुरू हुई। वीरप्पन के गांव वाले उसे किसी देवता से कम नहीं समझते हैं। गांव के लोगों का के मुताबिक सभी वीरप्पन के बारे में सिर्फ स्कैंडल सुनना चाहते हैं ये कोई नहीं जानना चाहता कि एक गरीब आदमी वीरप्पन कैसे बन गया।

पकड़ने में कई पुलिसवालों की गई जान

साल 1987 में वीरप्पन (veerappan) ने देश को तब हिलाकर रख दिया जब उसने चिदंबरम नाम के एक फॉरेस्ट अफसर को किडनैप किया था। फिर उसी वक्त एक पुलिस टीम को ही उड़ा दिया, जिसमें 22 लोग मारे गये। इसके बाद साल 2000 में वीरप्पन ने कन्नड़ फिल्मों के हीरो राजकुमार को किडनैप कर लिया। रिहाई के लिए फिरौती रखी 50 करोड़ की।

कई लोग मानते थे रॉबिनहुड

वीरप्पन (veerappan) का एक और किस्सा बहुत मशहूर है। दरअसल, वीरप्पन ने साल 1997 में सरकारी अफसर समझकर जिन दो लोगों को किडनैप किया लेकिन असल वो फोटोग्राफर निकले। इन्होंने वीरप्पन के साथ 14 दिन जंगलों में गुजारे। इन लोगों ने बाद में इस घटना पर किताब भी लिखी थी, 'बर्ड्स, बीस्ट्स एंड बैंडिट्स'। ये किताब वीरप्पन के आतंक की कहानियों से हटकर थी। इतना हा नहीं उसके इलाके के लिए लोग अगर उसे रॉबिनहुड मानते थे ।