
सफेद मूसली का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। सफेद मूसली में कई गुण होते हैं और कई तरह के रोगों के उपचार में काम आती है। इससे खांसी, अस्थमा, बवासीर, चर्मरोगों, पीलिया, पेशाब संबंधी रोगों, ल्यूकोरिया आदि के उपचार हेतु इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा सफेद मूसली डायबिटिज के उपचार में भी प्रभावी है। इसकी खेती ज्यादा मुनाफा दे सकती है। बाजार में अच्छी श्रेणी की सफेद मूसली 1000-1500 रू. प्रति किलोग्राम तक मिलती है। ऐसे में इसकी खेती किसानों के लिए काफी मुनाफे का सौदा हो सकती है। इसकी खेती पूरे देश में की जाती है। यह गर्म तथा आर्द्र प्रदेश का पौधा है।
8-9 महीने की फसल
सफेद मूसली की फसल तैयार करने में लगभग 8-9 महीने का समय लगता है। इसे मानसून में बोया जाता है और फरवरी-मार्च तक इसकी फसल तैयार हो जाती है तो इसे खोद लिया जाता है। इसकी खेती के लिए किसान मानसून से पहले गर्मियों में ही खेत खोद लेते हैं। खेतों में बेड्स एक मीटर चौड़ा तथा एक फीट ऊँचा बनाकर 30 सेमी. की दूरी पर कतार बनाई जात है। इसमें 15 से.मी. की दूरी पर पौधे लगाते हैं। बेड्स बनाने के पूर्व 300-350 किलो प्रति हेक्टिेयर की दर से नीम या करंज की खल्ली मिलाने से फसल अच्छी होने की संभावना रहती है।
7-10 दिन में पौधे उग जाते हैं पौधे
सफेद मूसली की बुवाई के लिए बीजों के हिसाब से खड्डे खोदे जाते हैं। इसके बाद उन गड्ढो में बीज डालने के बाद हल्की मिट्टी डालकर भर देते हैं। बीजों की रोपाई के बाद ड्रिप द्वारा सिंचाई की जाती है। बुआई के 7 से 10 दिन के अन्दर यह उगना प्रारम्भ हो जाता हैं। उगने के 75 से 80 दिन तक अच्छी प्रकार बढ़ने के बाद सितम्बर के अंत में पत्ते पीले होकर सुखने लगते हैं तथा 100 दिन के उपरान्त पत्ते गिर जाते हैं।
इसके बाद जनवरी-फरवरी में जड़ें उखाड़ी जाती हैं। मूसली बरसात में लगायी जाती है। नियमित वर्षा से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। अनियमित मानसून में 10-12 दिन में एक सिंचाई दें। अक्टूबर के बाद 20-21 दिनों पर हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए। मूसली उखाडने के पूर्व तक खेती में नमी बनाए रखें।
कई किस्म की होती है सफेद मूसली
बता दें कि हमारे देश में सफेद मूसली की कई किस्में पाई जाती हैं। उत्पादन एवं गुणवत्ता की दृष्टि से एम डी बी 13 एवं एम डी बी 14 किस्म अच्छी है। इस किस्म का छिलका उतारना आसान होता है। अ श्रेणी की मूसली देखने में लंबी. मोटी, कड़क तथा सफेद होती है। दातों से दबाने पर दातों पर यह चिपक जाती है। बाजार में प्रायः इसका भाव 1000-1500 रू. प्रति किलोग्राम तक मिल सकता है।
Published on:
23 Dec 2020 01:15 pm
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