
महिला के शव को साइकिल पर बांध कर श्मशान पहुंचा शख्स, गांव वालों की करतूत जान खौल उठेगा खून
नई दिल्ली। 24 अगस्त 2016 आपके लिए एक साधारण दिन रहा होगा, लेकिन इस दिन ओडीशा में एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला था जिसने पूरे देश की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए थे। जी हां, इसी दाना मांझी नाम के एक शख्स की पत्नी अमांग की उड़ीसा के भवानीपटना अस्पताल में टीबी से मौत हो गई थी। एंबुलेंस के पैसे न होने की वजह से दाना अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लेकर करीब दस किलोमीटर पैदल चले थे। हालांकि दाना को बहरीन के प्रधानमंत्री ख़लीफ़ा बिन सलमान अल-ख़लीफ़ा से 9 लाख रुपये की मदद दी गई थी, जिससे उनकी ज़िंदगी बदल गई। दाना ने अपने लिए एक घर बना लिया, एक मोटरसाइकिल खरीद ली और दूसरी शादी भी कर ली।
लेकिन एक बार फिर से ओडीशा से ठीक वैसी ही तस्वीरें सामने आईं, जिन्हें देखने के बाद आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। पूरा मामला ओडीशा के बौद्ध ज़िले का है। ज़िले के कृष्नापल्ली गांव के निवासी चतुर्भुज बांक की पत्नी की बहन की डायरिया से मौत हो गई। महिला ने अस्पताल में इलाज के दौरान ही बीते बुधवार को दम तोड़ दिया था। अस्पताल की ओर से मिली एंबुलेंस महिला की बॉडी को चतुर्भुज के घर पर लाकर छोड़ दिया, लेकिन गांव के किसी भी सदस्य ने महिला की अर्थी को कंधा देने से साफ इंकार कर दिया। जिसके बाद चतुर्भुज को महिला की लाश को साइकिल पर बांध कर श्मशान तक ले जाना पड़ा। जहां उन्होंने महिला का अंतिम संस्कार किया।
बता दें कि चतुर्भुज की पहली बीवी से कोई बच्चा नहीं हो रहा था, जिसके बाद उन्होंने दूसरी जाति की एक अन्य लड़की से शादी की थी। चतुर्भुज का दूसरी जाति की लड़की से शादी करना गांव वालों को रास नहीं आया, जिसके बाद चतुर्भुज के परिवार का हुक्कापानी बंद हो गया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर से हमारे समाज में फैली कुरीतियों के काले दर्शन करा दिए हैं। लोगों को अपने सम्मान के आगे किसी शख्स की मुसीबत नहीं दिखाई दे रही। जहां चतुर्भुज के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा तो वहीं दूसरी ओर गांव वाले ऐसे हालातों में भी उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं।
Published on:
02 Aug 2018 04:55 pm
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