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‘अब्बा, मैं अल्लाह से मिलने जा रहा हूं’, और शरीर से धड़ाधड़ पार होने लगी गोलियां

‘मैं यहां फंस गया हूं अब्बा, मुझे मेरी गलतियों के लिए माफ करना। अब मैं अल्लाह से मिलने जा रहा हूं’।
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Sunil Chaurasia

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May 07, 2018

army

नई दिल्ली। अब कोई बंदा चाहे जितना भी पढ़ा लिखा हो, देश के साथ गद्दारी करेगा तो आतंकियों की मौत ही मारा जाएगा। क्योंकि जो हमारी सेना के जवान हैं न, वो ऐसों को समझाने में अपना समय बिल्कुल भी खराब नहीं करते हैं। जहां किसी ने कोई नापाक साज़िश रची, यहां से दे-दनादन गोलियां बरसनी शुरु हो जाती है। हमारे देश के रक्षा बजट में कोई कमी तो है नहीं, भारत सरकार ने 2018-19 के लिए अच्छा-खासा 2.95 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। और जब हमारा रक्षा बजट इतना मज़बूत है तो हमारे जवान दुश्मनों को भूनने के लिए इंतज़ार में समय क्यों बर्बाद करेंगे।

दरअसल हम बात कर रहे हैं एक उच्च शिक्षित प्रोफेसर की, जो कश्मीर यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी का प्रोफेसर था। 4 मई को उसने यहां आखिरी लैक्चर दिया, क्योंकि इसके बाद वह हैदराबाद यूनीवर्सिटी जाने वाला था। हैदराबाद यूनिसवर्सिटी में प्रोफेसर बनने के लिए हुए टेस्ट में मोहम्मद रफी बट ने टॉप किया था। लेकिन अफसोस रफी की मती मारी गई, जिससे वह अपना करियर चुनने के बजाए हिजबुल को चुन लिया। शोपियां में 6 मई की सुबह हमारे जवानों द्वारा घेरे जाने के बाद रफी ने अपने पिता के पास कॉल किया और कहा कि ‘मैं यहां फंस गया हूं अब्बा, मुझे मेरी गलतियों के लिए माफ करना। अब मैं अल्लाह से मिलने जा रहा हूं’।

बस फिर क्या था, जवानों ने शुरु कर दी धड़ाधड़ा फायरिंग। जिसमें रफी के साथ-साथ उसके 4 और हिजबुल के साथी भून दिए गए। महज़ 36 घंटों के लिए आतंकी बने रफी को हमारे जवानों ने और ज़्यादा समय नहीं दिया और भून दिया। रिपोर्ट्स की मानें तो रफी का कॉल ट्रेस कर उसके पिता से संपर्क किया गया था। ताकि वे अपने बेटे को समझा सकें कि वह सरेंडर कर दे। लेकिन अपनी ही धुन में सवार पढ़े-लिखे जाहिल ने सरेंडर करने से मना कर दिया, लिहाज़ा भून दिया गया।