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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी उपलब्धि, खोजा सबसे विशाल व चमकीला सुपरनोवा, जानिए खासियत

Highlights -ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए सुपरनोवा से भी 10 गुना अधिक शक्तिशाली सुपरनोवा को खोजा है -वैज्ञानिकों की मानें तो यह न सिर्फ सामान्य सुपरनोवा से 10 गुना अधिक शक्तिशाली है बल्कि उससे करीब 500 गुना ज्यादा चमकदार भी है -ब्रिटेन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने नेचर एस्ट्रोनॉमी नाम के पीयर रिव्यू जर्नल में प्रकाशित अपने शोधपत्र में इसका खुलासा किया है

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Most Powerful Supernova Ever Discovered in Universe

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नई दिल्ली. अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के हाथ एक बहुत बड़ी उपलब्धि लगी है। ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए सुपरनोवा से भी 10 गुना अधिक शक्तिशाली सुपरनोवा को खोजा है। यह सबसे ताकतवर है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह न सिर्फ सामान्य सुपरनोवा से 10 गुना अधिक शक्तिशाली है बल्कि उससे करीब 500 गुना ज्यादा चमकदार भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुपरनोवा दो विशाल तारों के आपस में टकरा कर एक हो जाने के दौरान बना है।


दो विशाल तारो के टक्कर से बना

नासा और ईएसए के मुताबिक वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुपरनोवा दो विशाल तारों के आपस में टकराकर एक हो जाने के दौरान बना है। ब्रिटेन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने नेचर एस्ट्रोनॉमी नाम के पीयर रिव्यू जर्नल में प्रकाशित अपने शोधपत्र में इसका खुलासा किया है।

एसएन-2016एपीएस दिया गया नाम

ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी और अमेरिका के हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स ने अपनी इस खोज को एसएन-2016एपीएस नाम दिया है। शोध के सह लेखक इडो बर्गर ने इसे इसके आकार और चमक के अलावा कई दूसरे मायनों में भी बेहद खास बताया है।

सबसे ज्यादा प्रकाश देने वाला सुपरनोवा

आम सुपरनोवा अपनी कुल ऊर्जा का सिर्फ एक फीसदी दिखने वाले प्रकाश तक ही सीमित दिखता है लेकिन इसका प्रकाश बेहद ज्यादा है। इसकी ऊर्जा 20 खरब गीगाटन टीएनटी के धमाके के बराबर होगी। शोध के मुताबिक, इसके आसपास के बादलों में हाइड्रोजन की मात्रा भी काफी ज्यादा है।


जानिए क्या होता है सुपरनोवा

किसी बहुत पुराने तारे के टूटने से वहां जो ऊर्जा पैदा होती है, उसे ही सुपरनोवा कहते हैं। कई बार एक तारे से जितनी ऊर्जा निकलती है, वह हमारे सौरमंडल के सबसे मजबूत सदस्य सूर्य के पूरे जीवनकाल में निकलने वाली ऊर्जा से भी ज्यादा होती है। सुपरनोवा की ऊर्जा इतनी शक्तिशाली होती है कि उसके आगे हमारी धरती की आकाशगंगा कई सप्ताह तक फीकी पड़ सकती है।