
नई दिल्ली। हमारा देश आज कितना भी विकसित क्यों न हो गया हो लेकिन काले और गोरे का भेद समाज में आज भी चरम पर है। आज देश के कई स्थानों पर किसी इंसान को उसके रंग के आधार पर परखा जाता है। सुंदरता का आधार भी गोरे रंग को ही माना जाता है। हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जिससे समाज में इस भावना की उपस्थिति जमकर देखने को मिली। दरअसल हुआ कुछ यूं कि भोपाल की रहने वाली सुधा तिवारी एक सरकारी स्कूल में अध्यापिका के पद पर कार्यरत है और उनका पति एक निजी अस्पताल में काम करता है। सुधा ने करीब डेढ़ साल पहले उत्तराखंड स्थित मातृछाया से एक बच्चे को गोद लिया था। सुधा की बड़ी बहन शोभना का कहना है कि पहले दिन से सुधा बच्चे के काले रंग को लेकर परेशान थी। करीबन एक साल पहले सुधा को किसी ने इस बात की सलाह दी कि यदि बच्चे को काले रंग के पत्थर से घिसा जाए तो उसका रंग गोरा हो सकता है। फिर सुधा ने आव देखा न ताव और रोजाना बच्चे की त्वचा को काले रंग के पत्थर से रगड़ना शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप बच्चे के शरीर पर घाव हो गए। सुधा की बड़ी बहन शोभना का कहना था कि उन्होंनें अपनी बहन सुधा को बहुत समझाया, लेकिन इसके बावजूद उसने अपना टार्चर जारी रखा। हालत की गंभीरता को देखकर उन्होंने चाइल्ड लाइन को इस बात की सूचना दी। सुधा के चंगुल से बच्चे को बचाने के लिए उसे हमीदिया अस्पताल में एडमिट कराया गया। शोभना ने मातृछाया पर आरोप लगाते हुए कहा कि नियम के मुताबिक मातृछाया को बच्चे का हाल—चाल पूछते रहना चाहिए था लेकिन उन्होंनें ऐसा नहीं किया। बता दें पत्थर घिसने से पहले सुधा ने उसका काफी इलाज भी करवाया ताकि उसका रंग गोरा हो जाए।
Published on:
02 Apr 2018 05:46 pm

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