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Panipat: कौन थे राजा सूरजमल? जिनके लिए थियेटरों में तोड़फोड़ की जा रही है

महाराजा सूरजमल ने मुगलों के सामने कभी घुटने नहीं टेके

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Vivhav Shukla

Dec 10, 2019

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नई दिल्ली। फिल्म पानीपत(Panipat) को लेकर भी विरोध बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारी थिएटरों में तोड़फोड़ कर रहे हैं। इनका कहना है कि फिल्म में महाराज सूरजमल (Maharaja Suraj Mal) का गलत चित्रण किया गया है। इससे जाटों की भावनाएं आहत हुई हैं। फिल्म एक्टर रणदीप हुड्डा ने भी इसपर आपत्ती जताई है। उनका कहना है कि एक समुदाय को गौरवान्वित करने के लिए दूसरे को नीचा दिखाना ठीक नहीं है। लेकिन ऐसा क्या दिखाया गया है? कौन थे जाट राजा सूरजमल ? हम आपको उनसे जुड़ील रोचक बातें बताने जा रहे हैं।

क्यों हो रहा है विवाद

फिल्म में पानीपत की ऐतिहासिक तीसरी लड़ाई की कहनी पर बनाई गई है।पानीपत की तीसरी लड़ाई साल 1761 में अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली और मराठाओं के बीच हुई थी। जिसमें जाट राजा सूरजमल ने मराठाओं का साथ दिया था। लेकिन फिल्म में दिखाया गया है कि युद्ध में मराठाओं का साथ देने के लिए जाट राजा सूरजमल आगरा के किले की मांग रख देते हैं। मांग पूरी नहीं होने पर वो मराठाओं का साथ देने से इनकार कर देते हैं। बस यहीं से विवाद शुरू होता है। लोगों का कहना है कि ये गलत है। राजा सूरजमल को लेकर ये तथ्य सही नहीं है। जिसके चलते राजा का अपमान हो रहा है।

कौन थे जाट राजा सूरजमल

राजपूत राजाओं में जाट महाराजा सूरजमल एकलौते ऐसे शासक हैं जिनका नाम लिया जाता है। सूरजमल, भारत को स्वतंत्र हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते थे। वे कभी मुगलों के सामने नहीं झुके। सूरजमल का जन्म औरंगजेब की मौत वाले दिन 13 फरवरी 1707 को हुआ। उनके पिता का नाम था राजा बदनसिंह । कहा जाता है कि राजा सूरजमल ने ही भरतपुर रियासत की नींव रखी है जिसे आज हम सब भरतपुर शहर के नाम से जानते है।राजा सूरजमल की वीरता के कई किस्से मशहूर हैं। बताया जाता है कि जयपुर रियासत के महाराजा जयसिंह के की मौत के बाद उनके बेटों के बीच विरासत को लेकर झगड़ा शुरू हो गया।जयसिंह के दो बेटे थे। ईश्वरी सिंह और माधोसिंह । दोनों आपस में विरासत के लड़ने लगे। वहीं सूरजमल न्यायसम्मत जयसिंह के बड़े बेटे ईश्वरी सिंह को राजा बनाने के पक्ष में थे। जबकि उदयपुर रियासत के महाराजा जगतसिंह छोटे बेटे माधोसिंह को राजा बनाने के पक्ष में थे.। साल 1747 में विरासत की जंग में ईश्वरी सिंह विजयी हुए।लेकिन माधो सिंह मराठों, राठौड़ों और उदयपुर के सिसोदिया राजाओं के साथ मिलकर ईश्वरी सिंह को मारने आ गया। तब सूरजमल ने ईश्वरी को बचाने के लिए अपने दोनों हाथों में तलवार लेकर मौदान में कूद पड़े और दुश्मनों को गाजर मूली की तरह काटने लगे। ऐसे कई और वीरता के किस्से हैं।

पानीपत की लड़ाई में की थी मराठों की मदद

पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठों और मुगल शासक अहमदशाह अब्दाली के बीच हुआ था। युद्ध बहुत ही भयंकर था।अहमदशाह की सेना ने हजारों मराठा योद्धाओं का मार दिया। मराठों के पास सेना खत्म हो चुकी थी। तब सूरजमल ने मराठों की मदद की। लेकिन 25 दिसम्बर 1763 को नवाब नजीबुद्दौला के साथ हिंडन नदी के तट पर लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। वहीं फिल्म में महाराजा सूरजमल के चरित्र को गलत तरीके से दिखाए जाने का आरोप लग रहा है। इसे लेकर राजस्थान में विरोध हो रहा है।