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37 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा ऐसा दुर्लभ योग, ये रहा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

क्षाबंधन का त्योहार जो एक हिंदू और जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

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37 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा ऐसा दुर्लभ योग, ये रहा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली।हिंदू धर्म में सभी त्योहारों का अपना ही महत्व होता है। भारत में हर साल कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। ऐसा ही एक त्योहार है रक्षाबंधन का त्योहार जो एक हिंदू और जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यहां श्रावण मास का मतलब सावन है। रक्षाबंधन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चांदी जैसी महंगी वस्तु तक की हो सकती है। भाई-बहन के प्यार का ये पर्व हर्ष-उल्लास का होता है। आजकल तो लोग इसे कुछ ज्यादा ही धूमधाम से मनाने लगे हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि, इस साल रक्षाबंधन 26 अगस्त को मनाया जाएगा और उस दिन रविवार भी है। शुभ मुहूर्त में राखी बांधने से अधिक फल मिलता है। सावन पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व अपने-आप में कई लोगों के जीवन में बहुत महत्त्व रखता है। जानकारी के लिए बता दें कि, सावन पूर्णिमा 25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट पर आरम्भ हो जाएगी। अगले दिन 26 अगस्त की शाम 5 बजकर 25 मिनट पर पूर्णिमा समाप्त होगी। बताया जा रहा है कि इस बार 37 साल बाद रक्षाबंधन पर ऐसा योग बन रहा है। इस बार के रक्षाबंधन में भद्रा काल नहीं है बल्कि धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। इस बार 26 अगस्त को सुबह 5.59 से लेकर दोपहर 3.37 बजे तक राखी बांधना उचित होगा।

इस दिन घर की (बहनें) लड़कियां और महिलाएं सुबह नहा धोकर पूजा की थाली सजाती हैं। इसके बाद थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई और कुछ पैसे सजती हैं। (भाई) लड़के और पुरुष तैयार होकर टीका करवाने के लिए पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं। इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीका करके चावल को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके बाद भाई श्रद्धा भाव से बहन को उपहार या धन देता है और जीवन भर अपने बहन को खुशी रखने एवं रक्षा करने का संकल्प लेता है।