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‘रॉबि‍न हुड आर्मी’ ने भूख के खिलाफ छेड़ रखी है जंग, दो देशों के बीच की कड़वाहट दूर करने के लिए उठाते हैं ये अनोखा कदम

14 और 15 अगस्‍त को 'रॉबिन हुड आर्मी' दोनों देशों के लाखों लोगों को खिलाती है खाना नौकरी पेशा करने वाले आम लोग ही हैं इस आर्मी का हिस्सा रेस्टोरेंट से बचे खाने से लाखों गरीबों का पेट भर्ती है रॉबि‍नहुड आर्मी

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Priya Singh

Aug 17, 2019

Robin Hood Army

नई दिल्ली। दो देशों के बीच की दूरी और कड़वाहट को दूर करने वाली रॉबि‍न हुड आर्मी का मकसद अनोखा है। 14 और 15 अगस्‍त को 'रॉबिन हुड आर्मी' दोनों देशों के लाखों लोगों को खाना खिलाने का काम करती है। देश और देश के बाहर ये आर्मी लोगों तक खाना पहुंचाती है। इस संस्था का नाम रॉबिन हुड इसलिए रखा गया क्योंकि वो अमीरों के घर चोरी करके गरीबों को खाना खिलाता था। ये संस्था अपनी मर्ज़ी से भारत-पाकिस्तान के लोगों तक खाना पहुंचाती है फिर चाहे दोनों देश के बीच कैसे भी संबंध क्यों न हों।

इस आर्मी में काम करने वाले लोग नौकरी पेशा करने वाले आम लोग ही होते हैं। ये लोग अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग अपने इलाकों के रेस्टोरेंट और लोगों के संपर्क में रहते हैं। ये लोग रेस्टोरेंट से बचा खाना ले लेते हैं ताकि उन्हें गरीबों में बांटा जा सके। ऐसा करने से बचा हुआ खाना बर्बाद भी नहीं होता है और जरूरतमंदों तक पहुंच भी जाता है। इतना ही नहीं रविवार के दिन ये रेस्टोरेंट्स गरीबों के लिए खास खाना भी बनाते हैं। इस संस्‍था ने भूख के खि‍लाफ जंग छेड़ रखी है।

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कैसे काम करती है रॉबिनहुड आर्मी

'रॉबिनहुड आर्मी' एक एनजीओ है। कई शहर के होटल में इनका नंबर रजिस्टर होता है। जिस रेस्टोरेंट में खाना बच जाता है, वहां से लोग इन्‍हें कॉल करते हैं। एनजीओ के मेंबर वहां से खाना लाकर गरीबों में बांट देते हैं। इस सेवा से खाना बर्बाद भी नहीं होता और गरीबों का पेट भी भर जाता है।

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हर साल आज़ादी के दिन होता है टारगेट

साल 2014 में दिल्ली से इसकी शुरुआत हुई। नील घोष और आनंद सिन्हा पुर्तगाल ने इसकी शुरआत की। हर साल आज़ादी के दिन ये संस्था ने भारत और पाकिस्तान को मिलाकर करीब पांच लाख गरीबों को खाना खिलाने का टारगेट तय करती है। लोग सोशल मीडिया के ज़रिए इस पहल का हिस्सा बनते हैं और गरीबों तक खाना पहुंचाने में योगदान देते हैं।