
Cricket
नई दिल्ली। भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता का अंदाजा भला किसको नहीं है। हमारे देश में क्रिकेट को खेल की बजाय धर्म समझा जाने लगा है। क्रिकेट के प्रति अनोखे लगाव को देखकर अब ये बात तो जगजाहिर हो गई है कि भारत में क्रिकेट जैसा और कुछ नहीं।
यह वो खेल है जो धर्म के नाम पर बंटे लोगों को आपस में जोड़ता हैं। फैंस पर खेल का जुनून इस कदर चढ़कर बोलता है कि लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। मगर यह खेल अब जितना बड़ा हो चुका है इससे होने वाले नुकसान भी नज़र आने लगे है।
ये बात अलग है कि क्रिकेट के कुछ साइड इफैक्ट्स भी हैं लेकिन इस खेल की लोकप्रियता इतनी है कि लोग इसकी आलोचना करने से भी हिचकते हैं। लेकिन अब इस पहलू पर बात करना भी जरूरी है क्योंकि सिर्फ किसी चीज के सकारात्मक पहलू पर ही नहीं बल्कि उसके नकारात्मक पहलूओं पर भी बात करनी चाहिए।
आइए आपको बताते है क्रिकेट के साइड इफैक्ट्स
यह बात भला कौन नकार पाएगा कि क्रिकेट के प्रभाव में बाकी खेलों को दरकिनार किया जाता रहा हैं। देश में कई वाकये ऐसे आए है जब हॉकी टीम जैसे मुख्य खिलाड़ियों को भी बुनियादी सुविधाएं देने से वंचित रखा गया।
यहीं वजह है कि बचपन से ही किसी भी बच्चे के मां-बाप अपने बेटे को एक क्रिकेटर बनते देखना चाहते है ना कि कुछ और।
क्रिकेट में फैली पैसे की खुमारी का नशा लोगों पर इस कदर चढ़ा हुआ है कि भारत में तमाम पाबंदियों के बाद सट्टेबाजी का खेल खूब फल फूल रहा है।
क्रिकेट के मुकाबले भारत में किसी और खेल में शिरकत करने वाले खिलाड़ी को बेहद कम तवज्जो मिलती है वहीं क्रिकेट और अन्य खेलों के मेहनताने में भी जमीन आसमान का अंतर है।
क्रिकेट का ग्लैमर लोगों के सिर चढ़कर इस कद्र बोल रहा है कि नए खिलाड़ी भी दूसरे खेलों के बजाय सिर्फ क्रिकेट की ओर आकर्षित होते हैं।
क्रिकेट मैच की एक एक गेंद, एक एक शॉट पर नजरें गड़ाए रखना कोई आसान काम नहीं हैं और इसके चलते यहां तो काम ठप्प पड़ जाता है. या फिर धीमा हो जाता है।
क्रिकेट के टी20 फॉर्मेट में खिलाड़ियों की लगने वाली बोलियां रोमन साम्राज्य के गुलाम ग्लेडिएटर्स की यादें फिर से ताजा कर देती है जो अपने लोगों के मनोरंजन के लिए अपनी जान गंवा देते थेे।
एक टेस्ट मैच 5 दिन का समय लेता है। वहीं 50 ओवरों का वनडे भी पूरा एक दिन ले लेता है। हालांकि टी20 आईसीसी से मान्यता प्राप्त सबसे छोटा फॉर्मेट है लेकिन इसमें भी तीन घंटे जाया हो जाते है के एक नए छोटे फॉर्मेट को भी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में मान्यता मिली है. लेकिन ये भी कई तरह से बहुत वक्त लेता है.
पिछले दिनों ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने भयंकर सूखे के बीच क्रिकेट के मैदानों की सिंचाई पर सवाल उठाकर इस तरफ ध्यान दिलाया कि इस खेल की बजाय बुनियादी जरूरतें ज्यादा मायने रखती हैं।
क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ने से यह खेल एक बाजार में तब्दील हो गया है। इस बाजार के सहारे कम्पनी क्रिकेट खिलाड़ियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए इस्तेमाल करती है।
Updated on:
25 Nov 2019 12:14 pm
Published on:
25 Nov 2019 12:13 pm
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