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श्रीलंका का वह बौद्ध भिक्षु जिसके कारण 9 मुस्लिम मंत्रियों को देना पड़ा इस्तीफा

श्रीलंका में हुए बम धमाकों के विरोध में बौद्ध भिक्षु ने किया अनशन आमरण अनशन के बाद 9 मुस्लिम मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

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sri lankan muslim minister resign because of buddhist monk Athuraliye Rathana

श्रीलंका का वह बौद्ध भिक्षु जिसके कारण 9 मुस्लिम मंत्रियों को देना पड़ा इस्तीफा

नई दिल्ली।श्रीलंका ( Sri Lanka ) में ईस्टर रविवार को हुए आतंकी हमले में बाद देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। उस दिन हुई घटना के बाद हफ्ते के शुरुआती दिनों में श्रीलंका सरकार के नौ मुस्लिम मंत्रियों और दो मुस्लिम प्रांतीय गवर्नरों को इस्तीफा देना पड़ा। सवाल यहां यह उठता है कि आखिर क्या वजह थी कि उन्हें एक साथ स्तीफा देना पड़ा। श्रीलंका में मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफे के पीछे हैं एक बौद्ध भिक्षु अतुरालिये रत्ना ( Athuraliye Rathana Thero )। अतुरालिये रत्ना ने होटलों में हुए बम विस्फोटों का आरोप लगाते हुए तीन मुस्लिम अधिकारियों पर उंगली उठाई थी।

सिर्फ दो अधिकारियों के इस्तीफे की मांग

अतुरालिये रत्ना ने श्रीलंका सरकार से उन्हें उनके पद से हटाने की मांग की थी। जब उनकी मांग पर अम्ल नहीं किया गया तब वे आमरण अनशन पर बैठ गए। बता दें कि बौद्ध भिक्षु रत्ना ने केवल उन्हीं तीन मुस्लिम अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की थी। लेकिन 8 मंत्रियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए साथ में इस्तीफा दे दिया। श्रीलंका के शहरी विकास, जल आपूर्ति और पेयजल मंत्री रउफ हकीम का कहना था कि, "श्रीलंका में बढ़ रहे तनाव को देखते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया है। साथ ही उन्होंने सरकार से निष्पक्ष जांच करने की मांग की है ताकि सभी आरोप मुक्त हो सकें।

LTTE का जड़ से सफाया करने की चलाई थी मुहीम

श्रीलंका सरकार में खुद एक सांसद अतुरालिये रत्ना राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ( Maithripala Sirisena ) के सलाहकार भी हैं। साथ ही वे दक्षिणपंथी बौद्ध राष्ट्रवादी पार्टी जकीता हेला उरुमाया के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं। जब यह पार्टी बनी थी तो इसका एजेंडा था LTTE का जड़ से सफाया और धर्मांतरण को रोकना। रत्ना के अनशन के दौरान उनके समर्थन में हजारों लोग उतर आए। इसके साथ ही उनके समर्थन में कोलंबो कैथोलिक चर्च के प्रमुख भी वहां पहुंच गए। रत्ना के अनशन के बाद आस-पास के इलाके में कई हिंसक घटनाएं सामने आने लगीं।

देशभर में इस फैसले की हो रही आलोचना

नेताओं ने जब इस्तीफे दिए तभी जाकर अतुरालिये रत्ना ने अपना अनशन खत्म किया। इसी के साथ मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफे की देशभर में आलोचना हो रही है। वरिष्ठ राजनेताओं ने बौद्ध भिक्षु की मांग को सांप्रदायिक करार देते हुए चिंता भी जाहिर की। वित्त मंत्री ने कहा, "हमारे प्यारे देश के लिए यह एक शर्मनाक दिन है।"