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महाशिवरात्रि: भगवान शिव की बहन किसी आम ननद से नहीं थीं कम, एक ही दिन में माता पार्वती को दिला दिया था गुस्सा

एक पौराणिक कथा में है भगवान शिव की बहन का वर्णन माता पार्वती को एक ननद की थी चाह असावरी देवी की हुई उत्पत्ति

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महाशिवरात्रि: भगवान शिव की बहन किसी आम ननद से नहीं थीं कम, एक ही दिन में माता पार्वती को दिला दिया था गुस्सा

नई दिल्ली। भगवान शिव का ना कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। वह स्वयंभू हैं ना वो जन्मे हैं और ना उनकी मृत्यु होनी है। भोले बाबा के बारे में कौन नहीं जानता! उनकी पत्नी माता पार्वती और उनके दो बच्चे भगवान शिव और देव कार्तिकेय हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की एक बहन भी थीं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता पार्वती का विवाह भगवान शिव से हुआ तब वह कभी-कभी घर में अकेला महसूस करती थीं। उनकी इच्छा थी कि काश!उनकी भी एक ननद होती जिससे उनका मन लगा रहता। माता पार्वती ने कभी भगवान शिव से अपने मन की बात नहीं की, लेकिन शिव तो अजन्मे हैं, वे तो अनादि हैं, वे बिना कहे ही देवी पार्वती के मन की बात समझ गए। उन्होंने माता पार्वती से पुछा कि क्या समस्या है देवी? तब देवी पार्वती ने उन्हें अपनी इच्छा बताई। उन्होंने कहा काश! उनकी भी कोई ननद होती।

इस पर भगवान ने देवी से कहा कि मैं तुम्हें ननद लाकर तो दे दूं, लेकिन क्या तुम उसके साथ रिश्ता निभा पाओगी? देवी ने कहा कि भगवान, ननद से मेरी क्यों नहीं बनेगी। भोलेनाथ ने कहा कि ठीक है देवी मैं तुम्हें एक ननद लाकर दे देता हूं। स्वयंभू ने अपनी शक्ति से एक देवी उत्पन्न की और देवी से कहा कि ये लो तुम्हारी ननद, इसका नाम असावरी देवी है। देवी पार्वती अपनी ननद को देख बहुत प्रसन्न हुईं।

कथा के अनुसार, असावरी देवी नहाकर आईं और उन्होंने माता पार्वती से भोजन मांगा। देवी ने उन्हें भोजन परोसा, लेकिन असावरी देवी इतनी भूखी थीं कि वे पूरे घर का अनाज खा गईं। घर में बचे बाकी लोगों के लिए खाने को कुछ भी नहीं बचा। देवी इस बात से चिंतित थीं। इसके बाद असावरी देवी को कपड़ों की आवश्यकता हुई। माता ने उन्हें नए कपड़े पहनने के लिए दिए। असावरी देवी काफी तंदुरुस्त थीं तो उन्हें वह कपड़े छोटे पड़ रहे थे। माता पार्वती कपड़ों का बंदोबस्त करने लगीं तभी असावरी देवी को इस बीच मज़ाक करने की सूझी।

असावरी देवी ने माता पार्वती को अपनी एड़ी में आई दरार में छिपा लिया। भगवान शिव माता पार्वती को ढूढ़ते हुए आए तो असावरी देवी ने झूठ बोला। भगवान भोलेनाथ समझ गए कि असावरी देवी झूठ बोल रही हैं। असावरी देवी ने धरती पर पैर पटका तो माता पार्वती उनके पैरों से निकलीं। गुस्से से लाल माता पार्वती ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा असावरी देवी का जल्दी से विवाह करके इन्हें घर से विदा करें। भोलेनाथ मुस्कुराए और असावरी देवी को उन्होंने कैलाश से विदा कर दिया।