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Irrfan Khan के इस से नजरिये से अगर आप देखेंगे अपनी जिंदगी, बदल जाएंगे आपके विचार, मिलेगी सिर्फ जीत

Highlights -इरफान (Irrfan Khan) के शानदार एक्टिंग करियर के सफर और उनके मजेदार किस्से हमेशा हमारे साथ हैं- इरफान खान (Inspiring movie dialogues) के कुछ दिन पहले ही जयपुर में इरफान की अम्मी सईदा बेगम की मौत हुई थी-आज भले ही वे हमारे बीच न हो पर इरफान खान (Powerful Irrfan Dialogues) नजरिये से जिंदगी देखेंगे तो वकाई आप सच में जिंदगी जी पाएंगे    

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Irrfan Khan के इस से नजरिये से अगर आप देखेंगे अपनी जिंदगी, बदल जाएंगे आपके विचार, मिलेगी सिर्फ जीत

Irrfan Khan के इस से नजरिये से अगर आप देखेंगे अपनी जिंदगी, बदल जाएंगे आपके विचार, मिलेगी सिर्फ जीत

नई दिल्ली. बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार इरफान खान ((Irrfan Khan) Death) अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन इरफान (Irrfan Khan) के शानदार एक्टिंग करियर के सफर और उनके मजेदार किस्से हमेशा हमारे साथ हैं। इरफान खान (Powerful Irrfan Dialogues) के कुछ दिन पहले ही जयपुर में इरफान ( (Inspiring movie dialogues)) की अम्मी सईदा बेगम की मौत हुई थी। वे 95 साल की थीं। इरफान नहीं जा पाए थे। अभी के हालात में कौन घर से निकल सकता है भला! शायद इसलिए दुनिया से ही निकल गए। इरफान मूल रूप से जयपुर के ही रहने वाले थे। वे बेहद बीमार थे। सालभर पहले ही लंदन से एक साल तक इलाज कराकर लौटे थे। फिर एक फिल्म की थी, जो अभी मार्च में ही रिलीज हुई है। नाम है ‘अंग्रेजी मीडियम’। आज भले ही वे हमारे बीच न हो पर इरफान खान नजरिये से जिंदगी देखेंगे तो वकाई आप सच में जिंदगी जी पाएंगे। आइए एक नजर डालते हैं उनके विचारों पर..


-गरीबी में जीना एक कला है।

-मुझे प्रमोशंस पसंद नहीं है और न ही इंटरव्यू देना अच्छा लगता है। मेरे लिए बात करना एक समस्या है और अपने बारे में बात करना तो एकदम बोरिंग लगता है।

-रिश्तो में भरोसा और मोबाइल में नेटवर्क ना हो, तो लोग गेम खेलने लगते हैं।

-मेरे साथ अजीब बात ये हुई है कि मैं लोगों का प्यार पाने के लिए एक्टर बना लेकिन मैं नहीं चाहता कि लोगों के ध्यान का केंद्र बना रहा हूं। मुझे बड़ा अजीब लगता है जब लोग मुझ पर नजर जमाए रहते हैं।

-पैसा अगर भगवान नहीं है... तो भगवान से कम भी नहीं है।

-दरअसल स्वभाव से मैं शर्मीला हूं। मुझे अपने किरदार के पीछे छुपा रहना और उसके जरिए अपने विचारों को जाहिर करना अच्छा लगता है, तभी तो मेरा किरदार मेरे लिए बहुत मायने रखता है।

-सिर्फ इंसान गलत नहीं होते.... वक्त भी गलत हो सकता है।

-मेरे लिए हमेशा टेस्टिंग का समय रहा है। चाहे वो फिल्में रही हो या TV यहां हर चीज की टेस्टिंग की जाती रही है; और अगर चीज लोगों को पसंद आ गई, तो 50 लोगों ने अलग अलग तरीके से रिपीट किया और फिर तो एक एक्टर के तौर पर आप बोर ही होते हो।

-आदमी जितना बड़ा होता है.... उसके छुपने की जगह उतनी ही कम होती हैं।

-हॉलीवुड प्रतिद्वंदी इंडस्ट्री है और वो किसी को माफ नहीं करती। आप चाहें तो देख सकते हैं, वहां लोग भले ही टैलेंटेड हो लेकिन उनके एक गलत कदम उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। इसके इसके विपरीत बॉलीवुड में अगर आपका एक भी गाना हिट हो गया तो आपके अगले 5 साल सुरक्षित हो जाते हैं।

-गलतियां भी रिश्तो की तरह होती हैं... करनी नहीं पड़ती, हो जाती है।

-शुरुआती दौर में मुझे यह लगता था कि मेरा चेहरा इस प्रोफेशन के लिए सूट करता है या नहीं। हां, मैं तब फिल्मों में जरूर देखा करता था कि मुझ जैसा भयानक क्या कोई और भी नजर आता है।

-एक्टिंग ऐसी लाइन है जिसके बारे में आप कुछ भी भविष्यवाणी नहीं कर सकते। यहां हर चीज सिर्फ अपनी प्रतिभा पर ही निर्भर करती है। आपकी किस्मत भी मायने रखती है, आपका समय कैसा चल रहा है, इसकी भी बड़ी अहमियत होती है।

-मेरे अंदर एक ललक जरूर थी, जिसे कुछ एक्टर्स प्रज्वलित रखते थे। उन्होंने ही मुझे दिशा दिखाई, मैंने जब नसीरुद्दीन शाह और दिलीप कुमार को देखा, तब समझ में आया कि एक्टिंग का मतलब केवल स्टाइल ही नहीं है, इसे जीना पड़ता है। फिर मुझे एहसास हुआ कि मैं इस कला के लिए किसी भी हद को पार कर सकता हूं।

-मैं ये प्रभाव नहीं पैदा करना चाहता कि मैं कितना महान हूं। इतना ही नहीं मैं खुद को लेकर किसी तरह की उम्मीद भी नहीं पालना चाहता।

-आज का युग बड़ा मजेदार है क्योंकि इस समय कमर्शियल और पैरलेल सिनेमा के बीच की लकीर धुंधला गई है। जो जरूरी भी था, अब सब्जेक्ट पर अधिक विश्वास किया जाने लगा है, कहानी कहने का तरीका भी बदल गया है। वो पहले की तरह डिटेल में न कहकर शार्ट में कही जाने लगी है।

-जब मैंने फिल्मों में काम करना शुरू किया, तब (महेश) भट्ट साहब कैमरे के पीछे चलाते थे, "इरफ़ान, तुम थोड़ी खराब ही एक्टिंग करो क्योंकि वो दर्शकों को समझ में आना चाहिए, वरना तुम्हारा करियर मिट जाएगा।"

-बच्चों के बढ़ने के साथ पिता पुत्र के रिश्ते का मिजाज बदलता रहता है। कभी-कभी लगता है कि काश मेरे पास कोई ऐसी दवा होती, जो उसे इतनी तेजी से बढ़ने से रोक पाती।

-बच्चों का दोस्त बने रहना और उन्हें सही दिशा में प्रेरित करना एक चुनौती पूर्ण कार्य है।

-बॉलीवुड में हम अपनी बात केवल भारतीयों से करते हैं जबकि हॉलीवुड में वैश्विक स्तर पर दर्शकों से मुखातिब होते हैं।

-यदि नकारात्मक प्रतिक्रियाएं जायज तो उनका स्वागत करना चाहिए। मैं आलोचना में किसी की तलाश करता हूं, फिर वो सकारात्मक या नकारात्मक।