
ये सबूत बताते हैं कि काल्पनिक नहीं है भगवान राम और उनकी अयोध्या
नई दिल्ली: राम जन्मभूमि पर काफी लम्बे समय से विवाद चल रहा है और बुधवार को जन्मभूमि जमीन विवाद में सुप्रीम ने सभी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। आपको बता दें कि बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि भगवान राम का और अयोध्या का वजूद ही नहीं था और ये पूरी तरह से काल्पनिक है। अगर आप भी ऐसा मानते हैं तो आज हम आपको भारत और श्रीलंका में मिले उन सबूतों के बारे में बताने जा रहे हैं जो ये बताते हैं कि भगवान राम और उनकी अयोध्या काल्पनिक नहीं है।
राम सेतु
राम सेतु श्रीलंका और भारत के बीच स्थित है और दुनियाभर में इसे 'एडम्स ब्रिज' के नाम से जाना जाता है। यह सेतु रामेश्वरम से शुरू होकर श्रीलंका के मन्नार को जोड़ता है। आपको बता दें कि जैसा कि रामायण में जिक्र है इस सेतु का निर्माण भगवान राम के आदेश पर वानरों की सेना द्वारा किया गया था। ये वही सेतु है जिसकी मदद से भगवान राम समुद्र पार करके अयोध्या पहुंचे थे और माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर भारत लाए थे।
हनुमान जी के पद चिन्ह
रामायण मे इस बात का ज़िक्र है कि जब हनुमान जी ने सीता जी को खोजने के लिए समुद्र पार किया था तब उन्होंने विशाल रूप धारण किया था जिसके चलते जब वो श्रीलंका पहुंचे तो उनके पैर के निशान वहां बन गए जो आज भी यहां पर कई जगहों पर मौजूद हैं।
श्रीलंका में हिमालय की जड़ी बूटी
श्रीलंका मे ऐसी कई सारी दुर्लभ जड़ी बूटियां पाई गयी हैं जो सिर्फ हिमालय में ही मिलती हैं। इन जड़ी बूटियों का यहां पर पाया जाना इस बात का संकेत है कि रामायण में लिखी बातें सत्य हैं।
रावण का महल
पुरातत्व विभाग को श्रीलंका में एक महल मिला है जिसे रामायण काल का बताया जाता है। रामायण में लंका दहन का वर्णन है जब हनुमान जी ने पूरी लंका मे अपनी पूंछ से आग लगा दी थी जलने के बाद उस जगह की की मिट्टी काली हो गई थी इस बात के प्रमाण भी यहां से मिलते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह रावण का ही महल है।
सीता की रसोई
सीता की रसोई राम जन्म भूमि के उत्तरी - पश्चिमी भाग में स्थित है। इस रसोई में भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न व उन सभी की पत्नियों सीता, उर्मिला,मांडवी और सुक्रिर्ति की मूर्ति लगी हुई हैं। साथ ही इस रसोई में बर्तन भी रखे हुए है। इस रसोई को माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है।
रावण का ससुराल
दशानन रावण के बारे में कर्इ कथाएं आैर मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ मान्यताआें के अनुसार रावण का ससुराल जोधपुर में मंडोर नामक स्थान पर है। ऐसा कहा जाता है कि रावण ने यहीं पर मंदोदरी के साथ फेरे लिए थे। इसी प्रकार जोधपुर के कुछ लोगों की पारंपरिक मान्यता है कि रावण उनके पूर्वजों में से एक था।
Published on:
06 Mar 2019 03:43 pm
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