
येरुशलम में इस ख़ास जगह दफनाया गया था ईसा मसीह का शरीर, अपनी ही कब्र के पास चलते हुए देखे गए थे
नई दिल्ली: आज यानी 19 अप्रैल का दिन गुड फ्राइडे कहलाता क्योंकि आज आज के ही दिन ईसा मसीह ( Jesus Christ ) को सूली पर चढ़ाया गया था और इस दिन के बाद से ईसाई इस दिन को गुड फ्राइडे के रूप में मनाते हैं। जानकारी के मुताबिक़ ईसा मसीह जब 33 वर्ष के थे तभी उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया था। आज इस खबर में हम आपको ईसा मसीह के बारे में ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिनके बारे में शायद आप पहले नहीं जानते होंगे।
जानकारी के मुताबिक़ ईसा मसीह सन 29 ई. को येरुशलम आ गए और यहां उन्होंने यूहन्ना (जॉन) से दीक्षा ली। लेकिन आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि येरुशलम में उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा था और जैसे ही वो यहां पहुंचे , विरोधियों ने उन्हें पकड़कर उन्हें सूली पर चढ़ा दिया। जिस समय ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था उस समय उनकी उम्र महज 33 साल थी।
जिस दिन ईसा मसीह ने येरुशलम में प्रवेश किया था वो रविवार था और सभी इस दिन को पाम संडे के रूप में मनाते हैं। लोगों के मन में आज भी सवाल उठता है कि ईसा मसीह को सूली पर तो चढ़ा दिया गया था लेकिन उन्हें दफनाया कहां गया था इस बारे में शायद बहुत सारे लोग नहीं जानते होंगे।
यहां पर दफनाए गए थे ईसा मसीह
ईसाइयों के लिए येरुशलम का बहुत अधिक महत्व है और ऐसा इसलिए है क्योंकि जानकारी के मुताबिक़ ईसा मसीह को इसी जगह सूली पर चढ़ाया गया और उनके मृत शरीर को फिर यहां स्थित एक गुफा में रख दिया गया और फिर बाहर से पत्थर दिया गया। शुक्रवार के दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था इसलिए इस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है लेकिन इसके बाद रविवार को उन्हें अपनी ही कब्र के पास घूमते हुए देखा गया। दरअसल मेरी मेग्दलेन ने उन्हें उनकी कब्र के पास जीवित देखा। जीवित देखे जाने की इस घटना को 'ईस्टर' के रूप में मनाया जाता है।
आपकोक बता दें कि यरुशलम के प्राचीन शहर की दीवारों से सटा एक प्राचीन पवित्र चर्च ( Church )है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहीं ईसा मसीह फिर से जिंदा हुए थे। इस चर्च का नाम चर्च ऑफ द होली स्कल्प्चर है । कहा जाता है कि इस चर्च में वो चट्टान है जिस पर 33वीं में ईसा मसीह को दफनाने के लिए रखा गया था।
Published on:
19 Apr 2019 07:05 am
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