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यूक्रेन की ये जासूस डॉल्‍फिन, विरोधी सबमरीन पर बम से करती थी हमला पकड़े जाने पर ऐसे दिखाती थी देशभक्ति

इस स्पेशल ट्रेनिंग में ये जासूसी करने के साथ बम प्‍लांट करने, शिप या सबमरीन को उड़ाने और गोताखोरों को चाकू या गोली से घायल

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यूक्रेन की जासूस थी ये डॉल्‍फिन, विरोधी सबमरीन पर बम से करती थी हमला पकड़े जाने पर कर लेती थी सुसाइड

नई दिल्ली। अपने दोस्ताना स्वभाव के लिए मशहूर डॉल्फिन बहुत अच्छी जासूस भी होती हैं। चौकसी के मामले में तो वह सुपर जासूस जेम्स बांड तक को मात दे सकती हैं। वहीं उक्रेन की डॉल्‍फ‍िनों ने देशभक्‍त‍ि की ऐसी मिसाल पेश की है। हाल ही में उक्रेन के एक अधिकारी ने दावा किया है कि उनकी डॉल्‍फ‍िन ने दुश्‍मन देश के कब्‍जे में जाने के बाद जान दे दी थी। एक अंग्रेजी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन डॉल्फिन्स को उक्रेन सेना में नेवी मिशन के लिए स्‍पेशल ट्रेनिंग दी गई थी। इस स्पेशल ट्रेनिंग में ये जासूसी करने के साथ बम प्‍लांट करने, शिप या सबमरीन को उड़ाने और गोताखोरों को चाकू या गोली से घायल करने में भी पारंगत थीं। इनसे बात करने के लिए सैनिक सीटियां बजाय करते थे और ये उन सीटियों का जवाब भी दिया करती थीं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में क्र‍िमिया पर रूस के कब्‍जे के बाद ये डॉल्‍फ‍िन रूसी सेना के कब्‍जे में चली गई थीं। उक्रेन की मीडिया संस्‍था ओबोजरावाटेल से क्र‍िमिया में उक्रेन के प्रतिनिधी बॉरिस बाबिन अधिकारी ने दावा किया है कि ये सभी डॉल्‍फ‍िन मर गई हैं। उनके अनुसार इन डॉल्‍फ‍िनों ने रूसी अधिकारियों के निर्देश मानने से इंकार कर दिया था। अधिकारी का यह भी दावा है कि सैनिकों को आक्रमणकारी समझते हुए उनके हाथ का खाना भी नहीं खाती थीं। जिसके बाद भूख हड़ताल पर रहते हुए उनकी मौत हो गई। अधिकारी के मुताबिक देशभक्‍त रहते हुए इन डॉल्‍फ‍िन ने जान दी है। शीत युद्ध के दौरान 1973 से ही सोवियत संघ की ओर से स्‍पेशल बोटलनोज डॉल्‍फ‍िनों को यह ट्रेनिंग दी जा रही थी। इन्‍हें सेवासटोपोल के विशेष ब्‍लैक सी पोर्ट में रखा गया था। सोवियत संघ के टूटने के बाद इन्‍हें यूक्रेन की नेवी में शामिल कर लिया गया था। आपको बता दें, एक अध्ययन में पाया गया है कि सोते समय भी डॉल्फिन आधी सचेत ही रहती है। सोते समय उसका आधा मस्तिष्क तो सोता है लेकिन आधा भाग उस समय भी सक्त्रिय बना रहता है। खास बात यह है कि अलर्ट अवस्था में डॉल्फिन लगातार 15 दिनों तक रह सकती है। नेशनल मरीन मैमल फाउंडेशन के ब्रायन ब्रांसटेटर के मुताबिक डॉल्फिन 15 दिनों तक इस आधी चेतना में रह सकती है। आपको बता दें कि डॉल्‍फ‍िन को भी कुत्‍तों जैसा माना जाता है। ये भी अपने पार्टनर या ट्रेनर से बिछड़ने या उसकी मौत हो जाने पर डिप्रेशन में चली जाती हैं जिसकी वजह से इनकी मौत भी हो जाती है।