
Genetic counseling
नई दिल्ली। जेनेटिक काउंसलिंग (Genetic counseling) का मतलब अनुवांशिक परामर्श से है। ये असल में परिवारों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं के विषय में निर्णय लेने में सक्षम बनाने की एक प्रक्रिया है। जेनेटिक काउंसलिंग की मदद से अनुवांशिक या वंशानुगत बीमारीयों को भविष्य की पीढ़ियों को स्थानांतरित करने से रोका जाता है।
सरल भाषा में समझाए तो जेनेटिक काउंसलिंग या अनुवांशिक परामर्श एक स्वास्थ्य जांच प्रक्रिया है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री एंजेलिना जोली का केस ले लेते हैं। एंजेलिना के परिवार में स्तन कैंसर की बड़ी स्ट्रांग फैमिली हिस्ट्री थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी जेनेटिक जांचें कराईं। जांच में पता चला कि
उनके शरीर में भी स्तन कैंसर पैदा करने वाला जीन पॉजिटिव है। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों की सलाह पर अपनी दोनों ब्रेस्ट ही ऑपरेशन करवा के निकलवा दीं। उन्हें पता चल गया था कि ब्रेस्ट कैंसर होने के चांस बहुत ज्यादा रहेंगे। इसलिए ब्रेस्ट ही निकलवा दिया। ऐसे में जब ब्रेस्ट ही नहीं होंगा तो फिर कैंसर कहां होगा।
कहने का मलतब ये है कि जेनेटिक काउंसलिंग से डॉक्टर को ये जाने में आसानी होती है कि आपके पति को या परिवार के किसी सदस्य को ऐसी बीमारी तो नहीं, जिसका जेनेटिक तौर पर बच्चे को होने का खतरा हो सकता है। इसकी मदद से भविष्य में होने वाली बीमारी से बचा जा सकता है।
कैसे होती है जेनेटिक बीमारी?
गर्भाशय के भीतर करीब नौ माह में मनुष्य का शरीर बनता है। शरीर बनने की शुरुआत कोशिका के बनने से शुरू होती है जो गर्भाधान के समय मां के अंडे और पिता के शुक्राणु के मिलन से तैयार होती है। इसी सूक्ष्म से कोशिका में मां तथा पिता के जींस आ जाते हैं जो आगे पूरे शरीर के विकास को नियंत्रित करते हैं। इन्हीं में वे भी जीन आ जाते हैं जिनसे आगे चलकर बीमारियां हो जाती है।
STI की जांच कराएं
बेबी कंसीव करने से पहले आपको अपनी और अपने पति की जेनेटिक काउंसलिंग जरूर करा लें। इसकी साथ ही आपको STI टेस्ट भी करवा लेना चाहिए। इससे आप बच्चे को होने वाली बीमारी से बचा सकते हैं।
Published on:
25 Sept 2020 11:18 am
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