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पीरियड्स के दिनों में यहाँ घर से निकाल दी जाती हैं महिलायें, नर्क बन जाती है ज़िंदगी

Banished for bleeding: देश में एक गाँव ऐसा भी है जहां महिलाओं को Periods के दिनों में घर से बाहर निकाल दिया जाता है और ये महिलायें नरक जैसी ज़िंदगी जीने के लिए विवश हो जाती हैं।

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Mahima Pandey

Jun 13, 2022

Women are ‘evicted’ from this village during menstrual period

Women are ‘evicted’ from this village during menstrual period

देश और दुनिया में आपको अजीबोगरीब प्रथाएं देखने को मिलेंगी। कुछ प्रथाएं ऐसी होती हैं जो महिलाओं के लिए किसी सजा से कम नहीं होतीं, खासकर पीरियड्स को लेकर। आधुनिक समाज में भी देश में ऐसी कई जगहें हैं जहां आज भी महिलाओं के साथ पीरियड्स के दिनों में रूढ़िवादी परंपरा का पालन करना पड़ता है। उन्हें कभी एक कमरे तक सीमित कर दिया जाता है तो कभी घर से निकाल दिया जाता है। एक ऐसा ही गाँव है जहां पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को घर से नहीं बल्कि गाँव से ही निकाल दिया जाता है। वो घर के बाहर नर्क जैसी जिंदगी जीने को विवश हो जाती हैं।

रूढ़िवादी परंपरा का पालन आज भी
हम जिस गाँव की बात कर रहे हैं वो छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मानपुर ब्लॉक के डोमीकला और गट्टेपयली गांव हैं। यहाँ सालों से एक रूढ़िवादी परंपरा का पालन किया जाता हैऔर महिलायें भी इसका कोई विरोध नहीं करती हैं। यहाँ जब किसी महिला को पीरियड्स आते हैं तो उसे गाँव के बाहर एक झोपड़ी में रहना पड़ता है। जिस झोपड़ी में ये महिलायें वो न केवल बदबूदार होती है बल्कि सुविधा विहीन भी होती है। महिलाओं को उन दिनों काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बालिकाओं और महिलाओं के लिए रात में इस तरह की झोपड़ी में रहना और कठिन हो जाता है। यहाँ तक कि उनकी सुरक्षा भी खतरे में रहती है।

चलाया जा चुका है जागरूकता अभियान
इस गाँव के लोगों को पीरियड्स से जुड़ी सभी जानकारियाँ दी गईं और उनकी सोच को भी बदलने के प्रयास किये गए। प्रशासन और शासन के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों ने भी यहाँ के लोगों को समझाने के प्रयास किये पर कोई लाभ नहीं हुआ। वास्तव में गाँव के लोगों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अपवित्र मानी जाती हैं इसलिए उन्हें घर से बाहर कर दिया जाता है।

इसी तरह सभी महाराष्ट्र की सेवाभावी संस्था ने सभी को जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाए लेकिन गाँववालों पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। इसके बाद इस संस्था ने महिलाओं के लिए बेहतर झोपड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इस संस्था ने इन महिलाओं के लिए गाँव के बाहर सेल्फ-रेस्टिंग होम बनाए हैं जहां यहाँ की बच्चियाँ और महिलायें पीरियड्स के दिनों में सुरक्षित और सुविधा के साथ रहने लगी हैं।

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