
महिलाओं का इंसाफ: बलात्कारी को अदालत में ही उतारा था मौत के घाट
नई दिल्ली। अकसर इंसान को उसकी गलती का एहसास नहीं होता है और जब होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस बीच वो और भी गुनाह करता है क्योंकि उसे ऐसा लगने लगता है कि उसे कुछ नहीं होगा, कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है लेकिन हमारे पूर्वजों का ऐसा कहना था कि किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती है। कुछ ऐसा ही हुआ अक्कू यादव के साथ जिसे लोग भरत कालीचरण’ उर्फ़ ‘कल्लू यादव के नाम से भी जानते थे।
अक्कू हमेशा महिलाओं को छेड़ता था, उन पर भद्दे कमेंट्स करता था और तो और वो उन पर यौन आक्रमण भी करता है। दिल्ली के कस्तूरबा नगर में रहने वाले 32 वर्षीय अक्कू यादव पर कई संगीन आरोप थे। वो अपने सामने महिलाओं को कुछ नहीं समझता था। यहां के एक स्थानीय वकील का कहना है कि एकबार अक्कू उनके एक रिश्तेदार को अपहरण करने की कोशिश की जिससे यहां की स्थानीय महिलाएं आग बबूला हो गई।
बार-बार पुलिस से अक्कू की शिकायत करने के बाद भी जब उनकी तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो इससे पुलिस पर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। स्थिति को बिगड़ते देख पुलिस ने अक्कू को गिरफ्तार कर लिया।
13 अगस्त, साल 2004 में अक्कू को जब स्थानीय अदालत में पेश किया गया तो उस दौरान वहां मौजूद महिलाओं के एक उग्र समूह ने उसे पीट-पीटकर मार डाला।
यहां की महिलाओं को इस बात का कोई पछतावा नहीं था बल्कि उनका ऐसा कहना था कि अक्कू जेल से बाहर रहकर महिलाओं पर अत्याचार करता था। वो बलात्कार करता था। महिलाओं को गाली देता था। पुलिस उस पर मुकदमा करने से इंकार कर रही थी क्योंकि अक्कू उन्हें मोटी रकम रिश्वत देता था। महिलाओं का कहना था कि अक्कू ने कम से कम तीन लोगों को मौत के घाट उतारा और हत्या के बाद उनकी लाशों को रेल की पटरियों पर बिछा देता था।
इन सारी घटनाओं से स्थानीय महिलाएं त्रस्त थीं। साल 2004 के 13 अगस्त के दिन जब अक्कू को अदालत में पेश किया जा रहा था तो उसने भीड़ में खड़ी पीड़ित महिलाओं की ओर देखकर उन्हें वेश्या कहा जिससे महिलाओं के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने मिलकर अक्कू का ऐसा हश्र किया जिसके बारे में उसने पहले कभी सोचा भी न था।
कस्तूरबा नगर की लगभग 200 महिलाओं की भीड़ उस पर टूट पड़ी। पुलिस की ओर से उन पर काबू करना नामुमकिन था।अक्कू को सत्तर से अधिक बार चाकू मारा गया। उसके चेहरे पर मिर्च पाउडर और पत्थर फेंके गए।इतना ही नहीं बल्कि उसके कथित पीड़ितों में से एक ने तो उसका गुप्तांग तक काट दिया था। इतनी बेरहमी से शायद ही इससे पहले किसी को मारा गया हो।
इस मामले में पांच महिलाओं को तुरंत मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन शहर में प्रदर्शनों के चलते पुलिस को उन्हें रिहा करना पड़ा। उस दौरान ऊषा नारायण नामक एक समाज सेविका को भी हिरासत में लिया गया था जिन्हें साल 2012 में कुछ और महिलाओं के साथ छोड़ दिया गया था।
इस घटना को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि कभी किसी को कमजोर समझकर उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना बाद में आपको ही भारी पड़ सकता है।
Published on:
02 Jun 2018 11:32 am
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