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सीसीबी पुलिस ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

हिंदू संगठन की कार्यकर्ता चैत्रा कुंदापुर की ओर से भाजपा के टिकट के लिए एक व्यवसायी को धोखा देने के मामले की जांच कर रही सीसीबी पुलिस चिक्कमगलूरु में जांच कर रही है। पुलिस ने आरोपी भाजपा युवा मोर्चा के गगन को चिक्कमगलूरु के आईबी में ले जाकर पूछताछ की, जहां करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के सिलसिले में बैठकें हुई थीं।

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सीसीबी पुलिस ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

सीसीबी पुलिस ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

चैत्रा धोखाधड़ी मामला
चिक्कमगलूरु.हिंदू संगठन की कार्यकर्ता चैत्रा कुंदापुर की ओर से भाजपा के टिकट के लिए एक व्यवसायी को धोखा देने के मामले की जांच कर रही सीसीबी पुलिस चिक्कमगलूरु में जांच कर रही है।

पुलिस ने आरोपी भाजपा युवा मोर्चा के गगन को चिक्कमगलूरु के आईबी में ले जाकर पूछताछ की, जहां करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के सिलसिले में बैठकें हुई थीं।

पता चला है कि चिक्कमगलूरु आईबी में स्थल निरीक्षण चल रहा है। व्यवसायी से दूसरी मुलाकात चिक्कमगलुरु के आईबी में हुई थी। इसी आईबी में चैत्रा गिरोह ने विविश्वनाथ जी से मुलाकात कराई थी। इसके चलते सीसीबी पुलिस गगन कडूरु को जगह का निरीक्षण कराने के लिए ले आई है। सीसीबी पुलिस कडूर स्थित गगन के घर भी जाएगी और निरीक्षण करेगी।

पुलिस ने चिक्कमगलूरु आईबी दो कर्मचारियों से भी पूछताछ की। चैत्रा के गैंग की ओर से रूम प्राप्त करने की जानकारी हासिल की। कमरा लेने के लिए किसने फोन किया था इसकी जानकारी हासिल की। सीसीबी ने आईबी लेजर की भी जांच की परन्तु कर्मचारियों ने सीसीबी पुलिस को जानकारी दी कि वे कमर में फे्रशअप होने के लिए आए होंगे। आधिकारिक तौर पर आईबी का कमरा प्राप्त करने की कोई जानकारी नहीं मिली।

व्यवसायी गोविंद बाबु पुजारी को धोखा देने के मामले में सीसीबी पुलिस ने मंगलवार सुबह गगन को घटनास्थल पर ले आई थी।

विश्वनाथ कौन हैं?

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक 4 जुलाई को व्यवसायी गोविंद बाबु को चिक्कमगलूरु बुलवाकर भाजपा युवा मोर्चा के गगन कडूर से आईबी में मिलवाया था। तभी विश्वनाथ जी (रमेश) से परिचय करवाया गया था। उन्होंने विश्वनाथ को आरएसएस और भाजपा के समन्वयक के तौर पर पेश कर पैसे देने पर टिकट दिलवाने की बात कही थी। इसके तहत कारोबारी ने 3.50 करोड़ रुपए दिए थे। और अधिक धन प्राप्त होने के बाद विश्वनाथ जी की मृत्यु होने की कहानी रचकर भरोसा हासिल किया था। बाद में, संदेह होने पर व्यवसायी ने कश्मीर में एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को फोन कर पूछताछ की तो पता चला कि विश्वबाथ जी के नाम पर कोई वरिष्ठ आरएसएस प्रचारक नहीं है। रमेश ने विश्वनाथ जी बनने का नाटक किया था।