
भारतीय समाज में रीति-रिवाज एवं पर्व-त्यौहारों का महत्व विषय पर आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में युवाओं ने अपने विचार रखे।
पर्व-त्यौहार हमें एकता के सूत्र में बांधने के साथ ही हमारे सामाजिक सौहार्द को मजबूती प्रदान करते हैं। नागरिकों के मन में देशप्रेम व मित्रता का भाव जगाते हैं। हमारे त्यौहार हमारी भारतीय सांस्कृतिक परंपरा व भारतीय सभ्यता के प्रतीक हैं। ये त्यौहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इन पर्वों व त्यौहारों के माध्यम से हमारी संस्कृति की वास्तविक पहचान होती है। हमारे जीवन में त्यौहारों का बड़ा महत्व है। त्यौहार सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक हैं जो की सभी जन-जीवन में जागृति लाते हैं। हमारे यहां वसुुदेव कुटुम्बकम की भावना रही है जो भारतीय संस्कृति की परिचायक है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत विविधता में एकता को रेखांकित करती है। कई भाषाएं, वेश-भूषा, धर्म, रीति-रिवाज, त्यौहार हमारे देश की सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत बनाते हैं। कई प्रदेशों के अलग-अलग संगीत, नृत्य, नाटिकाएं, साहित्य का जुड़ाव भारत को एकता के सूत्र में बांधे रखता है। भारतीय संस्कृति में त्यौहार केवल उत्सव मनाने के अवसर से कहीं अधिक हैं। वे जीवन के सबसे गहरे और सबसे गूढ़ पहलुओं को व्यक्त करने का माध्यम हैं। प्रत्येक त्यौहार का अपना अनूठा महत्व होता है, जो मूल्यवान शिक्षा, आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और सांस्कृतिक परंपराएं प्रदान करता है जो पीढिय़ों से चली आ रही हैं। भारतीय समाज में रीति-रिवाज एवं पर्व-त्यौहारों का महत्व विषय पर आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में युवाओं ने अपने विचार रखे। प्रस्तुत हैं उनके विचार:
भारतीय संस्कृति समृद्ध
सिवाना निवासी ज्ञानेश मुणोत ने कहा, भारतीय संस्कृति समृद्ध रही है। यह विविधता में एकता को रेखांकित करने वाली है। राष्ट्रभक्ति राष्ट्र की शक्ति में अभिवृद्धि करती है। विभिन्न भाषा एवं रीति-रिवाज हमारी सांस्कृतिक एकता को मजबूती प्रदान करने का काम करती है।
हमारी संस्कृति का हिस्सा
बीजोवा निवासी लिखित राठौड़ ने कहा, भारत में रीति-रिवाज एवं पर्व-त्यौहार हजारों साल से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इससे न केवल सांस्कृतिक धरोहर मजबूत बन रही हैं बल्कि समाज को आपस में जोड़े रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इससे हमारा सामाजिक बंधन मजबूत होता है।
नई पीढ़ी का जुड़ाव
साण्डेराव निवासी अम्बर साकरिया ने कहा, हमारे यहां अलग-अलग रीति-रिवाज व परम्पराएं हैं। पर्व-त्यौहार उत्साह एवं उमंग से मना रहे हैं। इससे नई पीढ़ी का जुड़ाव होता है। पूर्वजों के दिए संस्कारों को इन पर्व-त्यौहार के माध्यम से हम आगे बढ़ा रहे हैं। हम संस्कार एवं संस्कृति को साथ में लेकर चल रहे हैं।
नई ऊर्जा एवं उल्लास का संचार
सिवाना निवासी जैनम गुलेच्छा ने कहा, हमारा देश विविधता से भरा हुआ है। हमारी संस्कृति, परम्पराएं एवं त्यौहार हमें एकता के सूत्र में पिरोते हैं। हमारे रीति-रिवाज एवं हमारे त्यौहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। यह हमारी पहचान को मजबूत बनाते हैं। इसी से नई ऊर्जा एवं उल्लास का संचार होता है।
Published on:
05 Aug 2024 11:55 am
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