11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

मिट्टी, रागी, हल्दी पाउडर और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बनी मूर्तियां खरीदने पर जोर

त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाने को लेकर जागरुकता अभियान   Soil, Ragi, Turmeric Powder and others Emphasis on buying idols made of natural materials

1 minute read
Google source verification
Emphasis on buying idols made of natural materials

Emphasis on buying idols made of natural materials

धारवाड़. पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने और त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाने के लिए कई संस्थाएं आगे आई हैं। हुब्बल्ली-धारवाड़ नागरिक परिषद समिति ने स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 40 से अधिक स्कूलों में ऐसे आयोजन होंगे।
त्योहार करीब है, इसलिए बाजार सजावटी वस्तुओं से जगमगा रहा है, जिनमें से ज्यादातर हानिकारक रसायनों से बनी हैं। जब उन्हें जलाशयों में विसर्जित किया जाता है, तो वे टैंकों को प्रदूषित करते हैं और जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।
पर्यावरणविद् और लेखक केएच नायक ने कहा, प्रत्येक छात्र को त्योहार को सही भावना से मनाने की शपथ लेनी चाहिए और त्योहार के दौरान पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाना चाहिए। छात्रों को अपने घरों में प्राकृतिक रंगों से रंगी हुई मिट्टी की मूर्तियां स्थापित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहार को सही भावना से मनाया जाना चाहिए और सजावटी वस्तुओं का कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
थर्मोकोल और प्लास्टिक से बचें
उन्होंने कहा कि मिट्टी, रागी, हल्दी पाउडर और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बनी मूर्तियों को खरीदने पर जोर दिया जाना चाहिए। मूर्तियों को स्थापित करने के लिए स्थापित मंडप भी पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बनाए जाने चाहिए और थर्मोकोल और प्लास्टिक से बचना चाहिए।
केवल भक्ति संगीत बजाएं
पर्यावरणविद् शंकर कुंबी ने कहा, पर्यावरण की सुरक्षा सभी का कर्तव्य है। हर साल पीओपी से बनी सैकड़ों बड़े आकार की मूर्तियां केल्गेरी और अन्य टैंकों में विसर्जित की जाती हैं, जो जल निकायों के लिए खतरा पैदा करती हैं। इसके अलावा पटाखे जलाने से बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण होता है जिससे सांस संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। आगमन और विसर्जन के दौरान डीजे बजाने से ध्वनि प्रदूषण और अप्रिय गाने बजते हैं, जिससे सामाजिक वैमनस्यता बढ़ती है। इसलिए केवल भक्ति संगीत बजाया जाना चाहिए और पटाखे नहीं फोड़े जाने चाहिए।