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जन्मभूमि से जुड़ाव का संकल्प: हुब्बल्ली में बसे जोधपुर मूल के परिवारों को एक मंच पर लाने की तैयारी, 14 जुलाई को होगा पारिवारिक सम्मेलन

राजस्थान के जोधपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से संबंध रखने वाले और वर्तमान में हुब्बल्ली में निवास कर रहे समाजबंधुओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जोधपुर एसोसिएशन के पुनर्गठन, समाज की भावी गतिविधियों तथा समाजजनों को एकजुट करने के विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने अपने सुझाव प्रस्तुत करते हुए संगठन को अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

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हुब्बल्ली में आयोजित बैठक में जोधपुर मूल के समाजबंधु जोधपुर एसोसिएशन के पुनर्गठन एवं आगामी सम्मेलन की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए।

हुब्बल्ली में आयोजित बैठक में जोधपुर मूल के समाजबंधु जोधपुर एसोसिएशन के पुनर्गठन एवं आगामी सम्मेलन की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए।

जोधपुर एसोसिएशन को औपचारिक रूप देने पर विचार
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 14 जुलाई को हुब्बल्ली में निवास कर रहे जोधपुर मूल के परिवारों का एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में समाज के लोग अपने परिवार सहित भाग लेंगे। सम्मेलन के माध्यम से जोधपुर एसोसिएशन को औपचारिक रूप देने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक गतिविधियों के आयोजन पर भी विचार किया जाएगा। सम्मेलन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए शीघ्र ही अगली बैठक आयोजित की जाएगी।

सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की पहल
बैठक में शामिल जोधपुर मूल के अभिषेक मेहता ने बताया कि हाल के वर्षों में जोधपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से कई नए परिवार रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में हुब्बल्ली आकर बसे हैं। ऐसे परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे, पारिवारिक रिश्तों को सुदृढ़ बनाने तथा आपसी सहयोग की भावना को बढ़ाने के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बदलते समय में अपनी जन्मभूमि, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जोधपुर मूल के लोगों को एक-दूसरे से परिचित कराने, आपसी संबंधों को मजबूत बनाने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए यह पहल की जा रही है।

मातृभूमि के प्रति जुड़ाव की भावना
बैठक में यह भी विचार रखा गया कि नई पीढ़ी को राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, लोक परंपराओं, खान-पान और रीति-रिवाजों से परिचित कराया जाए, ताकि बच्चों और युवाओं में अपनी मातृभूमि के प्रति जुड़ाव और गौरव की भावना विकसित हो सके। बैठक में केवल लूंकड़, राजेन्द्र लूंकड़, अभिषेक मेहता, भूपेन्द्र सिंघवी, संदीप मेहता, रीतेश सिंघवी, प्रदीप सिंघवी एवं गजेन्द्र कांकरिया सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।