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मोती बेचते-बेचते गदग पहुंच गए मारवाड़ी…

गदग से राजस्थानी समाज का सौ साल से अधिक पुराना नाताशहर में पत्थर फेंकेंगे तो वह या तो प्रिंटिंग प्रेस पर गिरेगा या हथकरघा पर...गदग में रहने वाले 90 फीसदी राजस्थानी परिवार नवगठित बालोतरा जिले सेरीडर्स फेस्ट

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Gadag has a lot of printing presses, also famous for handlooms

श्री मुनिरंजन जगद्गुरु तोंटदार्य सस्थान मठ गदग

गदग (कर्नाटक). गदग के बारे में एक किंवदंती है कि यदि आप शहर में पत्थर फेंकेंगे तो वह या तो प्रिंटिंग प्रेस पर गिरेगा या हथकरघा पर। गदग में जहां कई प्रिंटिंग प्रेस हैं तो इससे सटा शहर बेटागेरी हथकरघा के लिए प्रसिद्ध है। कला, साहित्य, संस्कृति, आध्यात्मिक और उद्योग के क्षेत्र में गदग की अपनी अलग पहचान है। उत्तर की सीमा में मालाप्रभा और दक्षिणी सीमा पर तुंगभद्रा बहती है। जिले में काली मिट्टी प्रमुख है। गदग उत्तरी कर्नाटक में हिंदुस्तानी संगीत का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और हिंदुस्तानी गायक भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी का घर है। 24 अगस्त 1997 को गदग नया जिला बना। यहां कई पुराने मंदिर और स्मारक है। वैष्णव परंपरा का वीरनारायण मंदिर तो शैव परंपरा का त्रिकुटेश्वर मंदिर यहां स्थित है।
राजस्थान मूल के करीब पांच सौ परिवार गदग में निवास कर रहे हैं। उनकी मानें तो गदग से राजस्थानी समाज का करीब सौ साल से भी अधिक पुराना नाता रहा है। ऐसा बताते हैं कुछ राजस्थानी परिवार मोती बेचते-बेचते गदग पहुंच गए और फिर यहीं के होकर रह गए। मौजूदा समय में पांच सौ परिवार में करीब 350 जैन परिवार है। जैन समुदाय में करीब ढाई सौ परिवार मूर्तिपूजक तथा करीब सौ परिवार स्थानकवासी एवं तेरापंथी है। गदग में श्री चिंतामणि पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर करीब 108 साल पुराना, श्री पाश्र्वनाथ जैन मंदिर 68 साल पुराना, वासूपूज्य जैन मंदिर 35 साल पुराना तथा श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ जैन मंदिर एवं दादावाड़ी करीब 15 साल पुरानी है। श्री राजस्थानी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ की ओर से श्री महावीर जैन एजुकेशन सोसायटी का संचालन किया जा रहा है। गदग में श्री पाश्र्वनाथ जैन अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन किया जा रहा है जिसमें सीबीएसई एवं स्टेट बोर्ड दोनों पाठ्यक्रम है। स्कूल 2004 में शुरू हुई थी जिसके संस्थापक चेयरमैन छगनलाल मिश्रीमल बाफना है। मौजूदा समय में करीब 1700 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। स्कूल में नवकार मंत्र का वाचन भी करवाया जाता है। गदग में निवास कर रहे प्रवासी सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहे हैं। कोविड के समय अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भोजन के पैकेट वितरित किए। जैन समाज समेत अन्य संस्थाओं के बैनर तले दाल-चावल-मसाले के पैकेट भी वितरित किए गए। करीब 20 साल पहले श्री जैन नवयुवक मंडल के बैनर तले तत्कालीन अध्यक्ष मनोज कुमार छगनलाल बाफना के नेतृत्व में गदग, हुब्बल्ली, विजयपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से एक हजार लोगों का संघ सम्मेद शिखरजी एवं नेपाल गया था। यह तीन सप्ताह का कार्यक्रम था। इसके लिए विशेष ट्रेन जैनम एक्सप्रेस से गोरखपुर तक गए और इसके बाद बसों से नेपाल गए। गदग में राजस्थान के बालोतरा जिले के मोकलसर एवं सिवाना गांव के रहने वाले राजस्थानी प्रवासी अधिक है। इसके साथ ही बालोतरा जिले के रमणिया, अरटवाड़ा, समदड़ी, असाड़ा, कनाना, पादरू, बालोतरा तथा जालोर जिले के सायला मूल के लोग भी बहुतायत में निवास कर रहे हैं। अधिकांश प्रवासी कपड़े, प्रोवीजन स्टोर, रियल एस्टेट, मेडिकल, प्लास्टिक, ज्वैलरी, इलेक्ट्रिकल व्यवसाय से जुड़े हुए है। गदग में करीब सौ साल से अधिक समय से राजस्थान मूल के लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मोकलसर में आदेश्वर भगवान के 25 साल पूरे होने पर रजत जयंती महोत्सव मनाया गया था। इसके लिए चालीस पेज की पत्रिका का प्रकाशन करवाया गया था। श्री सिंवाची ओसवाल जैन संघ की ओर से हर साल क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस बार तीन दिन तक चली प्रतियोगिता में 11 टीमों ने शिरकत की। प्रतियोगिता में पहली बार बालिकाओं की तीन टीमें शामिल हुई। गदग में रामदेव सेवा संगठन विष्णु समाज भी बना है। जो धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में अग्रणी है।

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धर्म-ध्यान के खूब आयोजन हो रहे
मेरे परदादा पीरदान राजाजी बाफना करीब सौ साल पहले गदग आ गए थे। गुजराती कच्छी जैन समाज के लोग भी करीब सौ साल पहले आ गए। यहां चार बड़े जैन मंदिर बने हैं और धर्म-ध्यान के आयोजन खूब होते हैं। वर्तमान में दो साध्वी भगवंतों के चातुर्मास भी चल रहे हैं। दो साल पहले ही गदग संघ ने दो मुमुक्षुओं की दीक्षा करवाई थी। करीब 42 साल बाद 279 सदस्यों का उपधान तप करवाया।
मनोज बाफना, मोकलसर निवासी
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कई परिवार तीन-चार पीढिय़ों से निवास कर रहे

शुरुआत में प्रवासी समाज के लोग कपड़ा, स्टेशनरी एवं किराणा के व्यापार से अधिक जुड़े थे लेकिन अब करीब हर क्षेत्र में व्यवसाय कर रहे हैं। कई परिवार यहां तीन-चार पीढिय़ों से निवास कर रहे हैं। राजस्थान से कर्नाटक आने का क्रम आज भी लगातार बना हुआ है। गदग जहां प्रिंटिंग प्रेस के लिए प्रसिद्ध रहा हैं तो बेटागेरी में हथकरघा एवं साड़ी का काम खूब होता है। हालांकि यह अब समय के साथ कम होता जा रहा है।
दीपचन्द तातेड़, कनाना निवासी
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रामदेव सेवा संगठन में हर जाति-वर्ग के लोग
गदग में रामदेव सेवा संगठन विष्णु समाज बना हुआ है जिसमें सभी जातियों के लोग जुड़े है। इसके माध्यम से धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों का आयोजन किया जा रहा है। अगले महीने जागरण का बड़ा आयोजन रखा गया है। राजस्थान से आने वाले राजनेताओं एवं प्रमुख लोगों का स्वागत-सत्कार किया जाता है।
भरत कुमार राजपुरोहित, रमणिया निवासी