
परमात्मा, प्रेम और प्राणवायु दिखते नहीं हैं
राणेबेन्नूर (हावेरी).
श्री सुमतीनाथ जैन श्वेताम्बर संघ की ओर से आयोजित शिविर में आचार्यश्री महेन्द्र सागर सूरी ने प्रवचन में कहा कि परमात्मा, प्रेम और प्राणवायु दिखते नहीं हैं पर अनुभव ही होता है। परमात्मा मुझे दिखते नहीं परन्तु मैं रोज अनुभव करता हँू।
चारित्र जीवन में कभी भी मुझे संसार अच्छा है ऐसा विचार कभी नहीं आता है। यह आपके ही कारण होता है, इसी कारण से मेरे इतने अच्छे भाव और वैराग्य बने रहते हैं। प्रेम में रोख महसूस करता है। एक माँ आकर पूछती है शाहेबजी साता में हो, छोटा बच्चा आता है पूछता है गुरुजी साता में हो। प्रेम दिखता नहीं है परन्तु अनुभव होता है। संघ का कितना कितना प्रेम मिलता है कि मैं बावरा बन गया हँू इस प्रेम के सामने।
संसार में कोई कैसा भी कितना भी बड़ा हो पर ऐसा इतरह से सबका प्रेम नहीं मिल सकता है। यह यहाँ ही मिलता है। मैं या आप जिंदा है यही प्रमाण है यहां कि हम जिंदा है। शरीर को टिकाने का काम प्राणवायु करता है। मन को टिकाने का काम प्रेम करता है और आत्मा को टिकाने का काम परमात्मा करते हैं। प्रेम की पाँच सीढिय़ा हैं। किसी को देखना, उसके बाद अच्छा लगना, उसे चाहना, उसे पाना, उस व्यक्ति को निभाना।
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Published on:
21 Sept 2023 07:27 pm
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