
हुब्बल्ली (कर्नाटक) के गब्बुर गली स्थित श्री रामदेव मंदिर परिसर में कथा का श्रवण कराते कथावाचक पुष्करदास।
हिंदू महाकाव्य रामायण में लक्ष्मण रेखा का वृतांत बताया गया है। यह लक्ष्मण की ओर से मिट्टी में खींची गई रेखा है। यह रेखा जंगल में उस निवास के चारों ओर खींची गई है जिसे उन्होंने अपने बड़े भाई राम और राम की पत्नी सीता के साथ साझा किया था। यह रेखा सीता की रक्षा के लिए है, जब वे राम की खोज में दूर थे। जब सीता लक्ष्मण से अपने भाई की खोज में प्रस्थान करने का अनुरोध करती हैं, तो अनिच्छा से राम की खोज करने जाने का फैसला करते है। हालांकि यह उसकी शर्त के अधीन है कि सीता उस सुरक्षा रेखा को पार नहीं करेगी जो उन्होंने आवास के चारों ओर खींची है। इस किंवदंती के अनुसार, राम, सीता और स्वयं उनके अलावा कोई भी व्यक्ति जो रेखा को पार करने का प्रयास करेगा, उसे जला दिया जाएगा। एक बार जब लक्ष्मण राम की खोज में निकल जाते हैं, तो राक्षस राजा रावण एक भिक्षुक के रूप में उस स्थान पर आता है और सीता से भिक्षा मांगता है। चाल का संदेह न करते हुए सीता अनजाने में लक्ष्मण रेखा को पार कर रावण को भिक्षा प्रदान करती है। रावण तुरंत उसका अपहरण कर लेता है और उसे अपने पुष्पक विमान पर लंका ले जाता है। यह रेखा दण्डकारण्य के जंगल में पंचवटी नामक स्थान पर खींची गई थी जो अब महाराष्ट्र के नासिक शहर का हिस्सा है।
साधु के वेश में लुटेरे घूम रहे
उदयपुर से आए कथावाचक पुष्करदास महाराज ने इसी नैतिकता की दुहाई देते हुए कहा कि आधुनिक भारतीय भाषा में लक्ष्मण रेखा का तात्पर्य एक सख्त परंपरा या नियम से है, जिसे कभी नहीं तोड़ा जाना चाहिए। यह अक्सर किसी कार्य की नैतिक सीमाओं को संदर्भित करता है, जिसे पार करने से अवांछनीय परिणाम हो सकते हैं। गुरुवार को यहां हुब्बल्ली (कर्नाटक) के गब्बुर गली स्थित श्री रामदेव मंदिर परिसर में 15 दिवसीय श्रीमद्भागवत, रामायण एवं नानी बाई का मायरा के दूसरे दिन कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि आज भी साधु के वेश में लुटेरे घूम रहे हैं। आज के साधुओं का भरोसा नहीं है। आज के समय में अपने बेटे-बेटियों को संभालना बहुत कठिन है। उन्होंने नई पीढ़ी को सीख दी कि मां-बाप, परिवार वालों की रेखा को लांघने की कोशिश कभी मत करना। माता-पिता अपनी संतान का कभी बुरा नहीं चाहते लेकिन आजकल के बच्चे खुद को अधिक समझदार मानते हैं और मां-बाप को तो यहां तक कह देते हैं कि आपमें तो अक्ल नहीं है।
साफ-सुथरे जीवन से ही ईश्वर की प्राप्ति
श्री रामदेव मरुधर सेवा संघ हुब्बल्ली के तत्वावधान में आयोजित कथा के दौरान उन्होंने कहा कि अभी जमाना बहुत बदल गया है। छल-कपट के जीवन से ईश्वर दूर हो जाएंगे। भगवान को पाना है तो जीवन को साफ-सुथरा बनाना होगा। श्री रामदेव मरुधर सेवा संघ हुब्बल्ली के अध्यक्ष उदाराम प्रजापत एवं सचिव मालाराम देवासी ने बताया कि 15 दिवसीय कथा 4 सितम्बर तक चलेगी। चातुर्मास के पावन पर्व पर आयोजित कथा प्रतिदिन सुबह 9 बजे से सुबह 11 बजे तक चल रही है।
Published on:
22 Aug 2024 03:36 pm
बड़ी खबरें
View Allहुबली
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
