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दिव्यांगों को नया जीवन दे रहा महावीर लिम्ब सेन्टर

विश्व दिव्यांग दिवस पर विशेष

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Mahaveer Limb Centre

Mahaveer Limb Centre

भगवान महावीर स्वामी के जीयो और जीने दो के संदेश को महावीर लिन्ब सेन्टर सही मायने में चरितार्थ कर रहा है। महावीर लिम्ब सेन्टर ने अब तक करीब पचास हजार दिव्यांगों को कृत्रिम पैर देकर उनके दैनिक जीवन को आसान बनाया है। सेन्टर ने दिव्यांगों को कृत्रिम पैर वितरण के प्रोजेक्ट का नाम स्वाभिमान रखा है।
दिव्यांगों के जीवन को सहज बनाने के साथ ही उनके जीवन के उच्च आदर्शों को सही मायने में चरितार्थ कर रहा है। इससे बड़ी मानव सेवा और कोई दूसरी नहीं हो सकती। जहां एक सेवा कार्य के जरिए सैकड़ों लोगों को चलने-फिरने और अपना कामकाज स्वयं करने की शक्ति दे दी गई है। यदि इसी प्रकार समाज के लोग दूसरों के हितों की चिंता करें तो यह मानव जीवन बेहद सहज और आदर्श बनाया जा सकता है। आनंदमय जीवन जीने का यही सबसे आसान सूत्र हो सकता है। कृत्रिम पैर हासिल करने के बाद दिव्यांगों की खुशी देखते ही बनती है। उनकी खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। समाज सेवा का यह अभियान सराहनीय है।
आसपास के प्रदेशों से आ रहे कृत्रिम पैर लगवाने
महावीर लिम्ब सेन्टर के अध्यक्ष महेन्द्र सिंघी ने बताया कि करीब तीन दशक पहले हुब्बल्ली में डॉ. एमसी मोदी एवं डॉ. एमएम जोशी नेत्र शिविर लगाते थे। एक बार हुब्बल्ली बस स्टेशन के पास एक व्यक्ति को कृत्रिम पैरों से चलते देखा। उसने बताया कि उसके पैर कट गए थे तब भगवान महावीर विकलांग समिति जयपुर से पैर लगवाए। तब लगा कि लोगों को जयपुर जाकर पैर लगवाने में काफी दिक्कत होती है। फिर हुब्बल्ली में ही शिविर लगवाया तो करीब 1500 आवेदन आए और करीब 450 लोगों के पैर जयपुर में तैयार करके मंगवाए। उस समय जयपुर जाने के लिए तीन ट्रेनें बदलनी होती थी। ऐसे में बहुत समय लग जाता था। कर्नाटक के लोगों को जयपुर जाकर पैर लगवाने में भाषाई दिक्कत भी थी। पैसा भी अधिक खर्च हो जाता था। ऐसे में कई लोग पैर से लाचार होने के बावजूद कृत्रिम पैर नहीं लगवा पाते थे। तब 1992-93 में ऑल इंडिया जैन यूथ फेडरेशन ने महावीर लिम्ब सेन्टर की स्थापना की। साल 1995 में किम्स में जगह दी गई। तब वीरेन्द्र जैन के चेयरमैनशीप के नेतृत्व में महावीर लिम्ब सेन्टर शुरू किया। इसके बाद से यह कारवां लगातार बढ़ता चला गया। आज तक करीब पचास हजार दिव्यांगों को कृत्रिम पैर लगाए जा चुके हैं। समूचे उत्तर कर्नाटक, गोवा, आन्ध्रप्रदेश एवं तेलंगाना से दिव्यांग यहां कृत्रिम पांव के लिए आ रहे हैं।
कृत्रिम पैर के बावजूद छू रहे बुलंदियां
सिंघी कहते हैं, यहां से कृत्रिम पैर लगा चुके जावेद दास्तिकोपा दिव्यांग प्रीमियर लीग खेल चुके हैं। मास्टर चिन्मया मंटूर रोट्टर एवं अभिनव अर्णावर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। बेलगावी की पूजा मगदूम स्वचा रोग विशेषज्ञ है। नाजिम पठान अंतरराष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी है। बागलकोट के कोट्रिस वालिकर रणजी क्रिकेट खिलाड़ी है। मंगला बेटगिरि फैशन डिजाइनर है। महावीर लिम्ब सेन्टर को कई बार सम्मानित किया जा चुका है। साल 2015 में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राज्य की श्रेष्ठ संस्था का खिताब मिला। 2021 में कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार मिला। यहां कोई भी व्यक्ति या दानदाना अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह, अपने परिजनों की पुण्यतिथि या किसी पर्व-त्यौहार के अवसर पर कुछ निश्चित धनराशि देकर दिव्यांगों के लिए कृत्रिम पैर लगवा सकते हैं।
पैर गंवाने का प्रमुख कारण दुर्घटना व डायबीटिज
सिंघी कहते हैं, अधिकांश लोग दुर्घटना में अपना पैर गंवा देते हैं। इसके साथ ही डायबीटिज एवं गैंगरिन के चलते भी लोग पैर खो देते हैं। कई बार सांप के डसने से भी पैर को काटना पड़ता है। इससे पहले संस्थान की ओर से प्लास्टिक सर्जरी के लिए शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। टाइपिंग एवं कम्प्यूटर की नि:शुल्क कक्षाओं का संचालन भी किया गया। छात्रों को पुस्तकों का वितरण भी किया। वर्तमान में महावीर लिम्ब सेन्टर के पदाधिकारियों में गौतम गोलेच्छा चेयरमैन, महेन्द्र सिंघी अध्यक्ष, अशोक कोठारी व निर्मल जैन उपाध्यक्ष, प्रकाश कटारिया सचिव, महावीर कुन्दुर संयुक्त सचिव, सुभाष डंक कन्वीनर, सुनील भूरट, बीरबल विश्नोई, भरत पालगोता, राजेश बोहरा, कांतिलाल बोहरा एवं डॉ. नीतेश जैन निदेशक के पद पर कार्यरत है।
कई संस्थाएं आ रही सहयोग के लिए आगे
सौंदती में चौपड़ा परिवार के सहयोग से कई दिव्यांगों को कृत्रिम पैर लगवाए। पूर्व मंत्री आरवी देशपाण्डे एवं पूर्व शिक्षा मंत्री नागमा केशवमूर्ति ने कई शिविरों का आयोजन करवाया है। मंत्री एचके पाटिल गदम में शिविर लगवा चुके हैं। हंसमुख सिंघवी ने आन्ध्रप्रदेश के बनगनपल्ली में तीन शिविर लगवाए। सत्य साई समिति बल्लारी ने तीन शिविर लगवाए। मानव सेवा समिति ने आन्ध्रप्रदेश के पोडतूर गांव में दो शिविर का आयोजन करवाया। लायंस क्लब, रोटरी, क्लब, जैन समाज के विभिन्न संगठनों की ओर से भी समय-समय पर शिविर लगवाए जाते रहे हैं। करीब छह साल पहले वीरेन्द्र जैन ने अपने बेटे की शादी का रिसेप्शन यहां किया। मुकेश सालेचा विवाह की वर्षगांठ पर दिव्यांगों को कृत्रिम पैरों का वितरण करते रहे हैं। राज्यपाल गुलाबचन्द कटारिया, मेनका गांधी, अनंत कुमार, सुखराम विश्नोई समेत अन्य हस्तियां यहां आ चुकी है।