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हुब्बल्ली की बेटी त्रिपुरा में एसडीएम, सिविल सर्विस परीक्षा के समय सप्ताह में एक बार पिक्चर देखती थी

उतार-चढ़ाव भरा रहा सफर, लेकिन नहीं डगमगाई और आखिर आइएएस बनकर ही दम लिया- राजस्थान के जालोर मूल की मेघा जैन - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर चुके मेघा की कविता को ट्विट - विश्व महिला दिवस पर विशेष- अशोक सिंह राजपुरोहित

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Megha Jain, IAS

Megha Jain, IAS

अक्सर हम छोटी सी असफलता से निराश हो जाते हैं या फिर बार-बार असफलता से उम्मीद टूट जाती है। ऐसे लोगों के लिए राजस्थान के जालोर मूल की हुब्बल्ली प्रवासी मेघा जैन किसी मिसाल से कम नहीं है। 2021 बैच त्रिपुरा कॉडर की आइएएस अधिकारी मेघा जैन वर्तमान में त्रिपुरा के खोवाई में एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं।
मेघा जैन के लिए आइएएस तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। बल्कि कई उतार-चढ़ाव भरा रहा लेकिन वे तनिक भी डगमगाई नहीं और आखिर सफलता हासिल करके ही दम लिया। वे पांचवे प्रयास में सफल हुई। इस सफलता में कड़ी मेहनत के साथ ही परिवार का नैतिक समर्थन रहा। सिविल सर्विस के पहले प्रयास में वे असफल हो गई। दूसरे प्रयास में सीधे साक्षात्कार तक पहुंची लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। तीसरे प्रयास में वे मुख्य परीक्षा तक पहुंची। चौथे प्रयास में फिर असफल रही। पांचवे प्रयास में उनका अंतिम रूप से चयन हो पाया।
मेघा जैन ने कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की परीक्षा 2014 में पास कर ली। इसके बाद एक साफ्टवेयर कंपनी में सवा साल काम किया लेकिन उनके मन में सिविल सर्विस की परीक्षा देने की धुन सवार थी। पिता मनोज जैन की भी इच्छा थी कि बेटी सिविल सर्विस की परीक्षा दें। मेघा ने कॉलेज की पढ़ाई के दौरान एक एनजीओ में भी कार्य किया था। उस समय से ही लोगों की सेवा करने के लिए सिविल सर्विस में जाने की इच्छा जगी थी। फिर दिल्ली एवं बेंगलूरु में जाकर तैयारी की। पांचवे प्रयास में जब चयन हुआ उस समय कोरोना काल था। इस कारण पूरे समय घर पर रहकर ही तैयारी की। अब पिछले साल दिसम्बर से त्रिपुरा में एसडीएम के पद पर कार्यरत है।

रोजाना पढें. समाचारपत्र
मेघा जैन की विद्यार्थियों को सलाह है कि यदि कोई सिविल सर्विस में आना चाहते हैं तो उन्हें कॉलेज स्तर से ही समाचारपत्र पढऩे की आदत डाल देनी चाहिए। साथ ही उन्हें मानसिक रूप से भी इस परीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। वे कहती हैं, मैं सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी के समय तनाव रहित रहने के लिए हर रविवार को शाम को लेपटॉप पर पिक्चर देखा करती थी। वहीं रोजाना करीब आधा घंटे पैदल घूमती थी। तैयारी के पहले दो साल में कोई स्मार्ट फोन भी नहीं रखा। बाद में भी स्मार्ट फोन पर केवल टेलीग्राम चलाती थी। वे बताती है कि मौजूदा समय में जहां वे एसडीएम के पद पर कार्यरत है, उस इलाके में बाल विवाह अधिक होता है। इसके साथ ही अन्य कई तरह के मामलों की वे रोज सुनवाई करती है।

पहले की सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी
मेघा जैन ने स्कूल में रहते राज्य स्तर पर भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया है। वे कविताएं भी लिखती रही है। एक कविता देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ट्विट कर चुके हैं। मेघा की छोटी बहन शिखा जैन एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। मेघा जैन ने पांचवी तक की पढ़ाई नवलगुण्ड के स्कूल से कन्नड़ माध्यम से की। बाद में दसवीं तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम तथा फिर हुब्बल्ली के बीवीबी इंजीनियरिंग कालेज से बीई (कम्प्यूटर साइंस) किया। मेघा स्टूडेन्ट यूनियन की महासचिव भी रही। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद एक साल तक बेंगलूरु में टेस्को कंपनी में नौकरी की, लेकिन नौकरी में मन नहीं लगा तो फिर सिविल सर्विस परीक्षा में जाने का मानस बनाया। मेघा जैन कहती है, जब दूसरे प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंचने के बाद भी अंतिम रूप से चयन नहीं हो पाया तो एक बार तो सिविल सर्विस की परीक्षा नहीं देने का मन बना लिया था लेकिन पिता मनोज जैन ने हिम्मत बंधाई और माता सरस्वती जैन का भी पूरा सपोर्ट मिला। इनकी बदौलत फिर से परीक्षा देनी शुरू की।