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सरकारी विभागों का डेढ़ हजार करोड़ से अधिक बिजली शुल्क बकाया!

गुलबर्गा विद्युत आपूर्ति निगम लिमिटेड (गेस्कॉम) के तहत विभिन्न सरकारी विभागों में 1,715.81 करोड़ रुपए का बिजली शुल्क बकाया है। राज्य बिजली आपूर्ति कंपनियों (एस्कॉम) ने राजस्व की कमी से बचने के लिए दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।

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सरकारी विभागों का डेढ़ हजार करोड़ से अधिक बिजली शुल्क बकाया!

सरकारी विभागों का डेढ़ हजार करोड़ से अधिक बिजली शुल्क बकाया!

गेेस्कॉम का भुगतान करने से कतरा रहे
भुगतान के लिए संबंधित विभागों भी लिखा पत्र
कलबुर्गी. गुलबर्गा विद्युत आपूर्ति निगम लिमिटेड (गेस्कॉम) के तहत विभिन्न सरकारी विभागों में 1,715.81 करोड़ रुपए का बिजली शुल्क बकाया है। राज्य बिजली आपूर्ति कंपनियों (एस्कॉम) ने राजस्व की कमी से बचने के लिए दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।

अपने नुकसान का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है परन्तु सरकारी विभागों की ओर से ही समय पर बिजली शुल्क का भुगतान नहीं किया जा रहा है। संबंधित विभागों को पत्र लिखने के बावजूद शुल्क का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

आरडीपीआर का सबसे अधिक बाकी

गेस्कॉम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मार्च 2023 के अंत तक, विभिन्न विभागों के बिजली शुल्क में 1,715.81 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें से ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग (आरडीपीआर) पर सबसे अधिक 1,556.69 करोड़ रुपए बकाया है।

एक अप्रेल 2022 को आरडीपीआर की बकाया राशि 1,133.87 करोड़ रुपए थी। 2022-23 के दौरान 506.17 करोड़ रुपए जोडक़र 1,640.04 करोड़ रुपए तक पहुंची है। एक वर्ष में केवल 83.35 करोड़ का भुगतान कर 1,556.69 बकाया रखा है।

शहरी विकास विभाग (यूडीडी) 110.48 करोड़ रुपए, लघु सिंचाई विभाग 23.12 करोड़ रुपए, ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता (बहु ग्राम योजना; आरडीडब्ल्यू एंड एसडी) विभाग 17.65 करोड़ रुपए, वृहद सिंचाई विभाग 1.78 करोड़ रुपए, राज्य और केंद्र सरकार के अन्य विभाग क्रमश: 5.57 करोड़ और 38 लाख शुल्क का भुगतान करना बाकी है। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग (सी एंड आई) ने 15 लाख रुपए बकाया रखा है।

उपभोक्ता पर मूल्य वृद्धि थोपना कितना सही

उपभोक्ता संतोष कुमार का कहना है कि आम जनता शुल्क का भुगतान नहीं करती है, तो जेस्कॉम के कर्मचारी आकर बिजली काट देते हैं। सरकारी विभाग सैकड़ों करोड़ रुपए शुल्क का भुगतान करने से कतराने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? नुकसान से बाहर निकलने के लिए आम उपभोक्ता पर मूल्य वृद्धि थोपना कितना सही है।

नियमित रूप से पत्र लिखे जा रहे हैं

नाम न बताने की शर्त पर गेस्कॉम के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ विभागों को समय पर अनुदान नहीं मिलने के कारण जीस्कॉम को बिजली का शुल्क भुगतान नहीं हो रहा है। संबंधित विभागों को नियमित रूप से पत्र लिखे जा रहे हैं।

यहां इतना शुल्क बाकी

कलबुर्गी जिले के विभिन्न विभाग 322.73 करोड़ रुपए, यादगीर- 68.89 करोड़ रुपए, बीदर- 402.16 करोड़ रुपए, बल्लारी- 192.24 करोड़ रुपए, विजयनगर- 347.95 करोड़ रुपए, रायचूर- 270.22 करोड़ रुपए और कोप्पल- 62.99 करोड़ रुपए का भुगतान करना है।