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बच्चे की प्रथम गुरु मां

विश्व मातृ दिवस पर NEEPA MEHTA, President, Rotary Club of Hubli Central

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NEEPA MEHTA, President, Rotary Club of Hubli Central

NEEPA MEHTA, President, Rotary Club of Hubli Central

हुब्बल्ली. रोटरी क्लब ऑफ हुब्बल्ली सेन्ट्रल की अध्यक्ष नीपा मेहता ने कहा कि बालक को सुसंस्कारी बनाने में माता-की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संस्कारों के सिंचन मै माता का प्रभाव अधिक होता है क्योंकि गर्भ से ही संतान पर माता के खान-पान, आचार-विचार आदि का प्रभाव पड़ता है। विश्व मातृ दिवस के अवसर पर मेहता ने कहा कि बच्चों की शिक्षा व परवरिश में मां की भूमिका सदैव ही महत्वपूर्ण रही है। या यूं कह लीजिए कि मां के बिना बच्चे की सही शिक्षा व परवरिश हो ही नहीं सकती। परिवार संयुक्त हो अथवा एकल, उसकी केंद्रबिंदु मां ही होती है। माता बचपन की पाठशाला की पहली गुरु होती है, जो बच्चों में संस्कार के बीज बोती है। संसार में बच्चे की प्रथम गुरु मां होती है। जो उसको अच्छे बुरे की समझ बताती है। एक विशेष प्रेम और अपनत्व है जो मां और उसके बच्चे के बीच मौजूद है जिसे कभी समाप्त नहीं किया जा सकता है। लेकिन मौजूदा दौर में संतान का मां के प्रति प्रेम-अपनत्व थोड़ा कम होते दिख रहा है जिसकी वजह पाश्चात्य संस्कृति और तकनीकी का इस्तेमाल माना जा सकता है।