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कॉलेज के टॉयलेट में वीडियो बनाने का नहीं मिला कोई सबूत

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य खुशबू सुंदर ने कहा कि उडुपी के एक निजी कॉलेज की छात्रा की निजी वीडियो रिकॉर्डिंग मामले में अब तक कोई सबूत नहीं मिला है। इस मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहिए।

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कॉलेज के टॉयलेट में वीडियो बनाने का नहीं मिला कोई सबूत

कॉलेज के टॉयलेट में वीडियो बनाने का नहीं मिला कोई सबूत

छात्रा का वीडियो बनाने का मामला: महिला आयोग ने कहा...
आयोग सदस्य खुशबू सुंदर ने उडुपी का दौरा कर पुलिस अधीक्षक के साथ की बैठक
उडुपी. राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य खुशबू सुंदर ने कहा कि उडुपी के एक निजी कॉलेज की छात्रा की निजी वीडियो रिकॉर्डिंग मामले में अब तक कोई सबूत नहीं मिला है। इस मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहिए।

मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग आगे आया है। इसके एक हिस्से के तौर पर आयोग की दक्षिण भारतीय महिला सदस्य खुशबू सुंदर ने उडुपी का दौरा कर वहां के पुलिस अधीक्षक के साथ बैठक की। बैठक में पुलिस ने पिछले दो दिनों की जांच और मामले की जानकारी दी।

इसके बाद खुशबू सुंदर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि निजी वीडियो बनाने की बात कही जा रही आरोपी तीन छात्राओं के मोबाइल फोन पर कोई वीडियो नहीं मिला है। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसमें कुछ भी नहीं मिला है। उन्होंने तीनों मोबाइल फोन का डेटा एकत्र कर लिया है। वे मोबाइल फोन को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भी भेज रहे हैं और वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद हमें स्पष्टता मिल सकेगी।

पीड़िता ने शिकायत दर्ज नहीं कराई

एफआईआर में देरी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए खुशबू सुंदर ने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन किया है। वहीं कोई शिकायत दर्ज नहीं कराने के कारण पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़िता ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पीड़िता ने पत्र के माध्यम से कहा है कि वह शिकायत दर्ज करना नहीं चाहती है।

युवतियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, वे आरोपी मात्र : सुंदर

खुशबू ने कहा कि मामले में कोई सबूत नहीं होने के कारण तीनों युवतियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वे आरोपी मात्र हैं। कोई उपयुक्त सबूत नहीं मिलने पर आरोप पत्र दाखिल करना संभव नहीं है। बिना सबूत के केस दर्ज नहीं किया जा सकता। फिलहाल उन छात्राओं को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि वॉट्सऐप पर ऐसे मैसेज चल रहे हैं कि ये मामला आतंकियों से जुड़ा हुआ है। इस तरह हमें खुद न्यायाधीश के तौर पर फैसला नहीं देना चाहिए। महिला आयोग और पुलिस अपना कर्तव्य निभा रही है। मामले में युवा दिमाग शामिल हैं। मामले की जांच सही तरीके से होनी चाहिए। महिला आयोग इस मामले में कोई सांप्रदायिक रंग देने नहीं आया है। हम महिलाओं की सुरक्षा के लिए मौजूद एक संगठन हैं। हम किसी खास समुदाय की महिलाओं के बचाव में नहीं आए हैं। हम बिना किसी राजनीतिक दबाव और बिना सांप्रदायिक प्रभाव के जांच करेंगे। कृपया इस मामले में कोई सांप्रदायिक रंग न डालें।