
रायचूर में पर्युषण पर्व की आराधना उत्साह पूर्वक परिसम्पन्न
रायचूर
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण के पावन आशीर्वाद से और महासभा उपासक श्रेणी के राष्ट्रीय संयोजक सूर्य प्रकाश सामसुखा के निर्देशानुसार रायचूर कर्नाटक में पर्युषण आराधना करवाने हैदराबाद की दो उपासिका बहिनें रंजू बैद और अंजू बैद उपस्थित हुईं।
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा रायचूर के तत्वावधान में पर्युषण कालीन सभी कार्यक्रमों को बहुत ही उत्साह के साथ व्यवस्थित रूप में मनाये गये। दिनांक 11 सितम्बर को उपासक बहनों के साथ सभी परिवारों की परिचय गोष्ठी रखी गई और सभा के अध्यक्ष माणकचन्द मरोठी ने उपासिकाओं का स्वागत किया। सभा के महिला मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं तथा समाज के तेरापंथी श्रावक श्राविकाओं से परिचय करवाया।
रायचूर में तेरापंथ के 10 परिवार प्रवासित हैं। सभी देव, गुरु और धर्म के प्रति पूर्ण निष्ठावान और श्रद्धाशील हैं। समाज में एकता, स्नेह व सहयोग का वातावरण है।
दिनांक 12 सितम्बर को प्रात: सवा नौ बजे पर्युषण पर्व का शुभारंभ जप-तप से किया गया। गुरुदेव की ओर से निर्देशित आठो दिवसों के बारे में उपासिका ने सभी को जानकारी दी व प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यक्रमों की संक्षिप्त रुपरेखा उपासिका रंजू ने उपस्थित श्रावक श्राविकाओं के बीच रखी। महासभा की ओर से निर्देशित उपासक आचार संहिता और श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन उपासिका अंजू ने किया।
प्रवचन के समय प्रवक्ता उपासिका रंजू बैद ने तीर्थंकर परम्परा के अन्तर्गत कालचक्र, छवों आरे, भगवान आदिनाथ, मल्ली नाथ, पार्श्वनाथ तथा भगवान महावीर के जीवनकाल व उनके अवदानों पर सारगर्भित वक्तव्य दिए।
इसी क्रम में प्रतिदिन के निर्धारित विशेष दिवस खाद्य संयम, सामायिक, वाणी संयम, जप स्वाध्याय, ध्यान व अणुव्रत चेतना आदि विषयों पर अंजू ने प्रभावी चित्रण किया। प्रतिदिन प्रेक्षा ध्यान का अभ्यास व विषय पर गीत संगान उपासिका की ओर से करवाया जाता है। प्रात: गुरु वंदना, दोपहर में तत्वज्ञान की कक्षाएं व सांयकाल में प्रतिक्रमण व रात्रि में विशेष प्रवचन श्रृंखला का बहुत ही सुन्दर व ज्ञानवर्धक क्रम रहा।
उपासिका अंजू ने सात दिन तक जैन जीवन शैली के 9 सूत्रों क्रमश: बहुत सुंदर व्याख्या की और रंजू ने ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित आख्यान सुनाए और एक दिन लोक का चित्र व मीमांसा पर विवरण रखा।
महिला मंडल की बहनों ने गीतिकाओं का संगान किया। ज्ञानशाला संयोजिका कुसुम नाहर के नेतृत्व में ज्ञानार्थियों ने रात्रिकालीन कार्यक्रमों में आकर्षक प्रस्तुति दी। ध्यान दिवस के दिन स्थानीय प्रेक्षा प्रशिक्षक रेणु मरोठी ने प्रेक्षा ध्यान के प्रयोग करवाए। जप दिवस के दिन श्रावक श्राविकाओं ने 13 घंटे का अनुष्ठान रखा।
संवत्सरी दिवस भी बहुत ही उत्साह से मनाया गया। प्रतिदिन लगभग 40 से 51 लोगों की उपस्थिति रहती थी। पर्युषण के दौरान एक अठाई स्वाति नाहटा, तेला प्रफुल्ल नाहटा व 80 एकाशन रीता लोढ़ा के सम्पन्न हुआ, लगभग 70 उपावस व 9 पौषध हुए। 20 ता को सामूहिक खमत खामणा रखा गया व उपासिकाओं के लिए भावपूर्ण आभार ज्ञापन शेषन श्रावक समाज ने रखा। इस प्रकार रायचूर में बच्चों, युवाओं बड़ों व बुजुर्ग वर्ग ने बहुत ही उत्साह के साथ पर्युषण व संवत्सरी पर्व मनाया। यह जानकारी मुनिलाल पारख ने दी।
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Published on:
22 Sept 2023 06:28 pm
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