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मानवता की शिक्षा देती रही राबिया बसरी

साहित्यकार अल्लागिरीराज कनकगिरी ने कहा कि सूफी संत परंपरा में राबिया बसरी साधना से तपकर पहली महिला सूफी संत बनी। राबिया बसरी का जन्म सातवीं शताब्दी में इराक के बसरा में एक गरीब परिवार में हुआ। राबिया रेगिस्तान में अपने आध्यात्मिक सफर पर निकल पडी और लोगों को मानवता की शिक्षा देती रही। कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ते हुए अपने आप को अल्लाह की शरण में समर्पित कर दिया।

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मानवता की शिक्षा देती रही राबिया बसरी

मानवता की शिक्षा देती रही राबिया बसरी


साहित्यकार अल्लागिरीराज कनकगिरी ने कहा
इलकल (बागलकोट). साहित्यकार अल्लागिरीराज कनकगिरी ने कहा कि सूफी संत परंपरा में राबिया बसरी साधना से तपकर पहली महिला सूफी संत बनी। राबिया बसरी का जन्म सातवीं शताब्दी में इराक के बसरा में एक गरीब परिवार में हुआ। राबिया रेगिस्तान में अपने आध्यात्मिक सफर पर निकल पडी और लोगों को मानवता की शिक्षा देती रही। कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ते हुए अपने आप को अल्लाह की शरण में समर्पित कर दिया।

वे इलकल में हम्पी कलाग्राम की ओर से डॉ. गोंगडशेट्टी अस्पताल के पास महांत मंच पर आयोजित लेखिका और शिक्षिका मुर्तुजा बेगम कोडगली की संत राबिया के जीवन पर आधारित पुस्तक को लेकर विमर्श, संवाद, रेखाचित्र और चित्र में राबिया और गज़़ल गायन कार्यक्रम में पुस्तक का परिचय देते हुए बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि अल्लाह की इबादत में लीन रहने वाली राबिया मानवकुल से संबंधित थी। उनका काव्य मानवीय मूल्यों पर आधारित है। गायक राजेन्द्र कट्टिमनी ने गजल गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। सबसे संत राबिया बसरी के जीवन को लेकर चित्र कलाकारों की ओर से बनाए गए रेखाचित्र और चित्र आकर्षण का केंद्र रहे। उडुपी के चित्र कलाकार कमाल अहमद माळेकोप्प, इलकल के जानेमाने चित्र कलाकार कासीम कनसावी, केंचप्पा बडिगेर, बेंगलूरु के नवीन कुमार, राजेश्वरी मोपगार, सरोजा मुंडेवाडी, रोशन कनसावी, दावणगेरे की सब्रीनताज, श्रीशैल धौत्रे, गुरूनाथ कट्टी, मासप्पा कब्बरगी ने कलाकृतियों की रचना कर खूब तालियां और वाहवाही बटोरी। पूजा हल्लूर ने स्वागत कर कार्यक्रम का संचालन किया।

भक्ति रस में डूबीं रही
सवदत्ती के साहित्यकार नागेश नायक ने कहा कि राबिया बसरी ने अत्यंत कठिन समय में भी अल्लाह पर विश्वास रखते हुए भक्ति में डूबी रहीं। अपने काव्य के जरिए मानवता का प्रचार किया। सातवीं शताब्दी में महिलाओं की स्थिति शोचनीय थी। उस दौर में बुराई के खिलाफ आवाज उठाने वाली धेर्यशाली महिला थी।

राबिया पुस्तक की लेखिका मुर्तुजा बेगम कोडगली ने राबिया बसरी के काव्य का विवरण देते हुए कहा कि यह मानवीय मूल्यों पर आधारित है। राबिया का काव्य हमें मार्गदर्शन करता है और आज भी प्रासंगिक है।

कार्यक्रम का उदघाटन डॉ. महालिंगप्पा गोंगडशेट्टी ने किया। संवाद कार्यक्रम में शिक्षक तथा साहित्यकार एस.के. कोनेसागर, सिद्दलिंगप्पा बिळगी, महांतेश अंगडी, बसवराज नाडगौड़ा, कृष्ण बडीगेर, शशीधर रूळी, मुत्तुराज अक्की ने विचार व्यक्त किया।