
खस्ताहाल शौचालय, मृगतृष्णा बनी स्वच्छता
छात्रावासों में सुविधाओं का टोटा
कलबुर्गी. अफजलपुर तालुक में समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के तहत 30 मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रावास हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अंतर्गत कुल 18 छात्रावास हैं, जिनमें से 12 स्वयं के हैं तथा 6 किराए के भवनों में संचालित हैं। कुछ छात्रावासों में स्वच्छ पेयजल की समस्या है। कुछ स्थानों पर स्वच्छ पेयजल इकाइयां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके चलते छात्र संघर्ष कर रहे हैं।
बुनियादी सुविधा नहीं
समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रावासों में 300 विद्यार्थी रहते हैं परन्तु कोई बुनियादी ढांचागत सुविधा नहीं है। शौचालय टूटे हुए खस्ताहाल हैं। छात्रों ने सुविधा के लिए कई बार तालुक समन्वय अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी से गुहार लगाई परन्तु कोई फायदा नहीं हुआ।
खेल का मैदान नहीं
5 साल पहले, कलबुर्गी रोड पर 60 लाख रुपए की लागत से स्नातक छात्रों के लिए एक भवन का निर्माण किया गया था। निर्माण के एक साल के अंदर ही यह लीक हो रहा है। हर कहीं दरारें पड़ी हैं। इसके चलते उन छात्रों को पीयू कॉलेज छात्रावास में स्थानांतरित किया गया है। एक ही छात्रावास में स्नातक और पीयू छात्र रहते हैं। उन्हें शौचालय की समस्या हो रही है। पुस्तकालय में बैठ कर पढ़ने के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं है। खेल का मैदान नहीं है।
प्रतिदिन संघर्ष है
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के 18 छात्रावास हैं। इनमें तालुक के हावनूर, मणूर, अफजलपुर शहर, उडचाण, करजगी में किराए के भवनों में छात्रावास चलाए जा रहे हैं। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है। स्वच्छता मृगतृष्णा बनी हुई है। शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। प्रतिदिन सतत संघर्ष करना पड़ता है।
कार्य योजना सौंपी
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के 6 छात्रावास किराए के भवनों में चल रहे हैं। जगह आवंटन के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड के अनुदान के तहत उडचाण में छात्रावास भवन के निर्माण के लिए एक कार्य योजना सौंपी गई है। स्थान की पहचान कर ली गई है।
-संजयकुमार, विस्तार अधिकारी, तालुक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
कोई फायदा नहीं हुआ
छात्रावास में बिस्तर उपलब्ध नहीं कराया है। शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। पुस्तकालय तो है परन्तु वह व्यवस्थित नहीं है। हमने कई बार समाज कल्याण विभाग के अधिकारी से शिकायत कर सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है परन्तु कोई फायदा नहीं हुआ।
-रमेश बसरीगिडद, छात्र, सरकारी डिग्री कॉलेज
Published on:
14 Aug 2023 09:20 am
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