
ग्रामीण अस्पतालों का नहीं मिल रहा लाभ
चिकित्सकों की कमी, इलाज के लिए संघर्ष कर रहे मरीज
जाकिर हुसैन पट्टणकुड़ी
हुब्बल्ली. गदग जिले के लक्ष्मेश्वर तालुक में चार सुसज्जित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं परन्तु तीन में कोई स्थाई डॉक्टर ही नहीं है। इसके चलते यहां के मरीजों को लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। लक्ष्मेश्वर तालुक के बालेहोसूर, सूरणगी, शिगली और यलवत्ती गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
अस्तित्वहीन हो गए अस्पताल
सभी केन्द्रों की सुन्दर इमारतें हैं परन्तु 24 घंटे ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं रहते हैं। इसके चलते अस्पताल अस्तित्वहीन हो गए हैं। वर्तमान में बालेहोसूर केंद्र में एक प्रशिक्षु डॉक्टर है। सूरंगी और शिगली केंद्रों में अनुबंध के आधार पर एक डॉक्टर तीन-तीन दिनों के लिए कर्तव्य दे रहे हैं। उनकी छुट्टी होने पर वहां कोई नहीं होता है। यलवत्ती में मात्र एक स्थायी डॉक्टर है।
बाह्य रोगियों की संख्या प्रतिदिन 400 से अधिक : तीनों केंद्रों में कोई स्थायी डॉक्टर नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोग इलाज के लिए लक्ष्मेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का रुख कर रहे हैं। इसके चलते लक्ष्मेश्वर में बाह्य रोगियों की संख्या प्रतिदिन 400 से अधिक हो रही है परन्तु यहां भी पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। इसके चलते सभी को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना नाम मात्र के लिए रह गया है।
परेशानी का सामना कर रहे मरीज : शिगली और सूरणगी अस्पतालों में डॉक्टर होते हैं, तो संबंधित अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी अधिक होती है परन्तु सप्ताह में तीन दिन ही डॉक्टर उपलब्ध रहने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों की नियुक्ति करें : मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन संस्था के तालुक अध्यक्ष सोमन्ना बेटगेरी ने बताया कि, आबादी के हिसाब से डॉक्टर होने चाहिए परन्तु आरोप लग रहे हैं कि सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। तालुक अस्पतालों में आवश्यकतानुसार अधिक से अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग को लेकर कई संगठन आंदोलन करते रहे हैं। इसके बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ। तालुक के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए उपयुक्त डॉक्टरों की नियुक्ति करनी चाहिए। वरना उग्र आंदोलन किया जाएगा।
अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है
लक्ष्मेश्वर अस्पताल को पांच डॉक्टरों की जरूरत है परन्तु वर्तमान में मात्र दो डॉक्टर ही ड्यूटी कर रहे हैं। इनमें से एक डेंटिस्ट है और दूसरा एमबीबीएस डॉक्टर है। एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ और एक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट की आवश्यकता है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और तालुक अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है। तालुक अस्पताल में केवल दो डॉक्टर हैं।
-सुभाष दायगोंड, चिकित्सा अधिकारी, लक्ष्मेश्वर तालुक
Published on:
22 Sept 2023 03:58 pm
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