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कोई मंदिर जाएं कोई तीर्थ जाएं चरणों में आके तेरे कोई शीश नवाएं…

शांतिनाथ भगवान पर वीडियो लांचहुब्बल्ली की मारवाड़ी बहुओं ने दिया स्वर

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Shantinath Bhagwan

भावगीत- मेरे शांतिनाथ

हुब्बल्ली. कोई मंदिर जाएं कोई तीर्थ जाएं चरणों में आके तेरे कोई शीश नवाएं...। शांतिनाथ भगवान पर गाए इन गीतों को स्वर दिया है हुब्बल्ली की दो बहुओं भावना संघवी व गीता जैन ने। हुब्बल्ली में निर्मित शांतिनाथ मंदिर के 102 साल पूरे होने के मौके पर वीडियो लांच किया। इसमें शांतिनाथ मंदिर की विशेषता का वर्णन गीतों के माध्यम से किया गया है। वीडियो को यू-ट्यूब पर अपलोड किया गया है। हुब्बल्ली के केशवापुर में चातुर्मास कर रही साध्वी भव्यपूर्णाश्री ने वीडियो लांच किया। दोनों बहुओं ने अपने नाम के शुरुआती अक्षरों को रखते हुए इसका नाम भावगीत रखा है। भाव यानी भावना और गीत यानी गीता। गाना करीब साढ़े तीन मिनट की अवधि का है। पर्यूषण पर अगला वीडियो जारी होगा। राजस्थान के मंडवारिया की रहने वाली भावना संघवी ने अपने पिता कांतिलाल से गायन की बारीकियां सीखीं। भावना ने इसी साल मई में कला क्षेत्र गायन प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार जीता था। उनके गायन के बोल थे- मेरी किस्मत में छलके आज संयम नाम आया है...। गीता जैन की भी गायन में विशेष रुचि रही है। गीता जैन इससे पहले चेन्नई में कई जगह गीतों की प्रस्तुति दे चुकी है।