26 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

श्रीराम कथा के दौरान राम-लक्ष्मण, वनगमन और केवट प्रसंगों से जीवन मूल्यों का संदेश

श्री राम कथा के दौरान कथावचिका सुभद्रा कृष्ण ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से भाईचारे, प्रेम, त्याग और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया। हुब्बल्ली (कर्नाटक) के गब्बुर गली स्थित बाबा रामदेव भवन में चल रही कथा में माता सुमित्रा के त्याग और उनके द्वारा लक्ष्मण को बड़े भाई श्रीराम के साथ वन जाने की सीख का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
2 min read
Google source verification
श्रीराम कथा का श्रवण करातीं कथावाचिका सुभद्रा कृष्ण तथा राम-सीता के पात्र।

श्रीराम कथा का श्रवण करातीं कथावाचिका सुभद्रा कृष्ण तथा राम-सीता के पात्र।

अयोध्यावासियों की भावनाओं का मार्मिक चित्रण
कथावचिका सुभद्रा कृष्ण ने कहा कि परिवार में भाइयों के बीच प्रेम और समर्पण का भाव भगवान राम और लक्ष्मण के चरित्र से सीखा जा सकता है। इसके विपरीत महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्योधन अपने भाइयों को उनका हक देने के लिए तैयार नहीं था। श्रीराम के वनगमन के प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा में अयोध्यावासियों की भावनाओं का मार्मिक चित्रण किया गया। राम के वन जाने की बात सुनकर माता कौशल्या सहित सभी की आंखों में आंसू आ गए। अयोध्यावासी भी श्रीराम के साथ चलने को तैयार हो गए। उनके मन में भाव था कि उन्होंने अभी राम को जी भरकर देखा भी नहीं है, इसलिए कुछ देर और ठहर जाइए।

वनगमन प्रसंग ने किया भावुक
कथावाचिका ने कहा कि भगवान राम सबको साथ लेकर चलने वाले और पिता के समान सबकी सेवा करने वाले आदर्श पुरुष हैं। वनगमन के समय भी उन्होंने अयोध्यावासियों का सम्मान किया और सभी को प्रणाम किया। कथा में आगे केवट प्रसंग का भी वर्णन किया गया, जिसमें केवट ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति भाव प्रकट किया। श्रीराम के वनगमन के प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचिका ने अयोध्यावासियों की भावनाओं का मार्मिक चित्रण किया। राम के वन जाने की बात सुनकर माता कौशल्या सहित सभी की आंखों में आंसू आ गए। अयोध्यावासी भी राम के साथ चलने को तैयार हो गए। उनके मन में भाव था कि उन्होंने अभी राम को जी भरकर देखा भी नहीं है, इसलिए कुछ देर और ठहर जाइए।

जीवन जीने की सीख देते हैं रामायण के प्रसंग
कथावाचिका ने कहा कि भगवान राम सबको साथ लेकर चलने वाले और पिता के समान सबकी सेवा करने वाले आदर्श पुरुष हैं। वनगमन के समय भी उन्होंने अयोध्यावासियों का सम्मान किया और सभी को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि रामायण के प्रसंग केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख देते हैं। प्रेम, त्याग, भाईचारा, सेवा और मर्यादा को जीवन में अपनाकर परिवार और समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। इन प्रसंगों के माध्यम से इन्हें जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। बाबा रामदेव मरुधर युवा संघ के वरिष्ठ सदस्य केसाराम चौधरी हरजी, धर्मेन्द्र माली कोसेलाव, रामलाल जणवा चौधरी बाली समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।