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हुबली

सिवाना की बहू-बेटियों ने योग से दिया स्वस्थ-तंदुरुस्त रहने का संदेश, केक काटकर पत्रिका को दी शुभकामनाएं

राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली का 19 वां स्थापना दिवस हर छोटी चीज में ढूंढ़ें खुशी और पैसे से ज्यादा रिश्तों को दें अहमियत

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दुनिया की सबसे कामयाब हस्तियां भी धन, दौलत, कामयाबी और प्रसिद्धि सब कुछ होने के बाद यह मानती रही हैं कि खुशी का कोई पर्याय नहीं है। खुशी एक चिडिय़ा की तरह है जो फुदकती हुई कभी भी, कहीं से भी आ सकती है। तो कई बार वह यह सब कुछ होने के बाद भी कहीं नहीं मिलती। विश्व अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस के अवसर तथा राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के १९ वें स्थापना दिवस की कड़ी में गुरुवार को यहां राजस्थान पत्रिका के साथ ही गढ़ सिवाना बहू मंडल तथा हुब्बल्ली की शान सिवाना की पहचान बाबुल की बेटियां के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सिवाना की बहू-बेटियों ने केक काटकर राजस्थान पत्रिका को शुभकामनाएं प्रेषित की। वहीं योगाभ्यास के जरिए स्वस्थ-तंदुरुस्त रहने का संदेश दिया। बड़े बुजुर्ग कहते थे पहला सुख निरोगी काया। स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ा सुख है। ऐसा माना जाता है कि जो समाज खुश रहता है वह समाज सबसे ज्यादा प्रगति करता है। जो देश सबसे ज्यादा खुशहाल है वह सबसे ज्यादा आर्थिक उन्नति भी करता है।
हर व्यक्ति अपने आप में परिपूर्ण
सिवाना की बहू-बेटियों ने इस बात का संदेश देने का प्रयास किया कि जीवन में चाहे जैसा भी समय हो इंसान को हमेशा शांत और समझदार बने रहना चाहिए। इससे जीवन में वह प्रगति की तरफ बढ़ता है। इसके साथ ही दूसरों के प्रति दया भावना को हमेशा रखना चाहिए। इससे लोग जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहते हैं। हर छोटी चीज में खुशी ढूंढ़ें। अपनी पसंद की चीजें करें। पैसे से ज्यादा रिश्तों को महत्व दें। लोगों को माफ करना सीखें। हर व्यक्ति अपने आप में परिपूर्ण है। जरूरी है अपनी खासियत को समझना और उस पर गर्व महसूस करना। हर इंसान में किसी न किसी चीज का शौक रहता है। खुद को खुश रखने के लिए अपने शौक को समय दें। फिर चाहें वह गीत-संगीत हो, पेंटिंग या नृत्य हो या फिर घूमना-खेलना हो। अपने शौक को समय देना आपको भावनात्मक संतुष्टि का अहसास करवाता है। प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने राजस्थान पत्रिका की विकास यात्रा के बारे में बताया।
जीयो और जीने दो को जीवन में अपनाएं
ममता कानूंगा ने कहा कि भगवान महावीर ने जीयो एवं जीने दो का संदेश दिया था। इसी में हमें अपार खुशी मिलती है। एक दिन पहले ही विश्व अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया। हम हर पल खुश रहें। प्रसन्न रहें तथा औरों के साथ खुशी बांटें। खुश रहने के लिए कोई उम्र नहीं होती। हर वक्त, हर समय और हर उम्र में खुश रह सकते हैं। संचल मेहता ने कहा कि खुशी मन की अवस्था है। खुशी से हर कोई चुस्त-तंदुरुस्त रहता है। खुशी में भले ही दो अक्षर है लेकिन खुशी मिलने पर इसका दायरा इतना विस्तृत हो जाता है कि जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। सफलता हमें खुशी दिलाती है। हम जिंदगी को खुशी से जिएं। लक्ष्मी कांकरिया ने कहा कि खुशी हमारी समृद्धि के द्वार खोलती है। खुश रहने से ही देश, परिवार एवं समाज और आगे बढ़ सकता है। हम हर हाल में खुश रहने का प्रयास करें।
इन बहू-बेटियों की रही सहभागिता

इस अवसर पर गढ़ सिवाना बहू मंडल तथा हुब्बल्ली की शान सिवाना की पहचान बाबुल की बेटियां की सदस्य ममता कानूंगा, अनीता रांका, संचल मेहता, सुरेखा बाफना, ललिता संकलेचा, मंजू एस. ओस्तवाल, जया मुणोत, कविता बाफना, लक्ष्मी कांकरिया, मंजू जी. ओस्तवाल, संगीता ओस्तवाल, संगीता कानूंगा, गुणवंती सालेचा, दक्षा छाजेड़, रेखा कांकरिया, उषा गुलेच्छा, रंजन मांडोत, पदमा गुलेच्छा, रतना सुराणा एवं नीतू जीरावला के साथ ही अन्य सदस्यों ने सहभागिता निभाई।