
समुद्र में ही नाव में मिल जाएगा मीठा पानी
मेंगलुरु
समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य मीठा बनाने की कोशिश की जा रही है, इसी बीच मछली पकडऩे के लिए रवाना होने वाली नाव में भी खारे पानी का संस्करण कर मीठा पानी प्राप्त करने का नया प्रयोग फिलहाल मेंगलुरु में चल रहा है।
एक सप्ताह तथा इससे अधिक दिन तक मछली पकडऩे के लिए समुद्र में रवाना होने वाले मछुआरे पीने तथा दैनिक उपयोग के लिए जरुरी पानी को रवाना होने से पहले ही नाव में संग्रह करते हैं। लगभग तीन हजार लीटर पानी की जरुरत होती है परन्तु आगामी दिनों में पानी को ले जाने के बजाय समुद्र से ही प्राप्त खारे पानी को शुद्धिकरण कर इस्तेमाल करने का यह प्रयोग फिलहाल मेंगलुरु में समीक्षा स्तर पर है। विदेशों में इस प्रकार की परिकल्पना प्रचलन में है।
इस दिशा में मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को अलिवे में मॉडल दिया गया है, जिसकी समीक्षा की गई है। इसके आधार पर आगामी दिनों में मत्स्य पालन मंत्री, विभाग के अधिकारी तथा प्रमुखों के साथ फिर से मॉडल को दिखाने का उद्देश्य है।
नाम में मशीन लगाने के लिए लगभग 4.50 लाख रुपए खर्च करने का आकलन किया गया है, जो मछुआरों के लिए बड़ा बोझ लगेगा। इसके लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी देने को लेकर बातचीत चल रही है।
ऐसे करेगा कार्य
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नाव के रवाना होने के दौरान ही खारे पानी के छोटे पाइप के जरिए संग्रह किया जाता है। बाद में पानी शुध्दिकरण मशीन के जरिए शुध्द पानी को संग्रह किया जाता है। इस प्रकार दिन में दो हजार लीटर पानी संग्रह कर सकते हैं। फिलहाल पानी संग्रह करने के लिए नाव में जगह की कमी के साथ अधिक भार का बोझ है। खारे पानी को शुध्दिकरण करने की कोशिश सफल होने पर पानी संग्रह के लिए जरूरी तथा भार की समस्या नहीं रहेगी।
मीठे पानी का कम इस्तेमाल
फिलहाल मछली पकडऩे के लिए रवाना होने के दौरान मीठे पानी का कम इस्तेमाल करना पड़ता है। क्योंकि कई बार नाव के समुद्र में होने पर ही मीठा पानी खाली होने पर मछुआरों को पानी की समस्या पेश आती है। इसके चलते नाव में मौजूद हर बूंद मीठे पानी को भी कम खर्च किया जाता है। इसके चलते नई खोज लागू होने पर इस प्रकार की समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
ठंडे पानी में इकाई
समुद्र के खारे पानी का संग्रह कर उद्योगों को देने वाली खारा पानी संस्करण इकाई को एमआरपीएल की ओर से ठंडे पानी के कुएं में लगभग अंतिम किया है। यहां संस्करण किए गए समुद्र के पानी को पाइपलाइन के जरिए एमआरपीएल को आपूर्ति किया जाता है।
प्रतिवर्ष खर्च होने वाली इस राशि में मचत होगी
मछली पकडऩे के लिए रवाना होने के दौरान लगभग तीन हजार रुपए के पानी को ले जाते हैं। माह में 12 बार रवाना होने पर 36 हजार रुपए चाहिए। इसके चलते खारे पानी का संस्करण करने की मशीन लगवाने पर प्रतिवर्ष खर्च होने वाली इस राशि में मचत होगी।
-रामचंद्र बैकंपाडी, नेता, मत्स्य पालन
अध्ययन चल रहा है
समुद्र के खारे पानी का इस्तेमाल करने की खातिर मछली पकडऩे के लिए रवाना होने वाली नावों में संस्करण इंजिन लगाने के संबंध में प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके फायदे-नुकसान के बारे में मछुआरों तथा विभाग की ओर से विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
-हरीश कुमार, उपनिदेशक, मत्स्य पालन विभाग, दक्षिण कन्नड़ जिला
Published on:
01 Sept 2021 11:40 am
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