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सारे अध्यात्मवाद की बुनियाद सुव्यवस्थित धार्मिक प्रवृत्ति है

सारे अध्यात्मवाद की बुनियाद सुव्यवस्थित धार्मिक प्रवृत्ति है

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हुबली

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S F Munshi

May 25, 2023

सारे अध्यात्मवाद की बुनियाद सुव्यवस्थित धार्मिक प्रवृत्ति है

सारे अध्यात्मवाद की बुनियाद सुव्यवस्थित धार्मिक प्रवृत्ति है

गदग
श्री पाश्र्वनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ। आचार्य श्री महेन्द्र सागरसूरि ने प्रवचन में कहा कि साधु-साध्वी श्रावक एवं श्राविका के सही समजपूर्वक दायित्व को निभाने पर ही धर्म शासन को चलाने का सीलसीला सच्चे रूप में हम अदा कर सकेंगे। साधु को अपनी साधना की शक्ति से शासन की रक्षा और प्रभावना और जीवों के हृदय में धर्म स्थापना का कार्य करने के लिए जोर लगाना होगा। श्रावक का जीवन भौतिकवादी जीवन शैली की काली छाया से मुक्त होना चाहिए तथा त्याग के भाव और वैराग्य उसके दिल में जीवंत होना चाहिए। श्रावक की जिस दिव्यता की खोज है उसे भौतिकवादी प्रवृति से प्राप्त नहीं कर सकते हैं। सारे अध्यात्मवाद की बुनियाद सुव्यवस्थित धार्मिक प्रवृत्ति है। समय रहते भावनाओं में सुधार लाकर हमें महावीर भगवान के पथ पर खुद को आगे बढ़ाना है। हमें अपनी जिम्मेदारीयो को गम्भीरता पूर्वक शुद्धि के साथ निभाना होगा। कल से श्री संघ में साप्ताहिक युवक युवतियों के शरीर का प्रभावशाली परिवर्तनकारी भव्य आयोजन का आगाज होगा।
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