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एक हजार से अधिक हेक्टेयर में फैले जंगल को होगा नुकसान, लोगों ने निर्माण पर जताई आपत्ति

माविनकोप्पा से आडुगोड़ी बाइपास के लिए कटेंगे हजारों पेड़18.84 हेक्टेयर में फैला है जंगल, जिसमें कीमती वनस्पति भी2.902हेक्टेयर भूमि है मैसूरु पेपर मिल्स की30.5किमी है वर्तमान हाइवे, नया बनने से दूरी 13.8 किमी कम होगी

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एक हजार से अधिक हेक्टेयर में फैले जंगल को होगा नुकसान, लोगों ने निर्माण पर जताई आपत्ति

एक हजार से अधिक हेक्टेयर में फैले जंगल को होगा नुकसान, लोगों ने निर्माण पर जताई आपत्ति

हुब्बल्ली. शिवमोग्गा जिला होसनगर तालुक से गुजरने वाले बेंदूर-राणेबेन्नूर राष्ट्रीय राजमार्ग-766 सी के विस्तार कार्य के लिए काटे जा रहे हजारों पेड़ों को लेकर स्थानीय लोग चिंतित हैं।

वन क्षेत्र से गुजरने वाली सडक़ होने के कारण 18.84 हेक्टेयर जंगल को नुकसान होगा। इससे लोगों की नींद उड़ी हुई है और वनों की कटाई और कीमती पेड़ों की सुरक्षा की आवाज सुनाई दे रही है।

कस्बे के बाहरी इलाके के माविनकोप्पा से सुत्ता गांव होते हुए आडुगोड़ी तक वन क्षेत्र में बाइपास निर्माण के लिए स्थल निरीक्षण व सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। सडक़ निर्माण के लिए निविदा की प्रक्रिया चल रही है। बाइपास के विस्तार को लेकर हाईवे अथॉरिटी ने सरकार और वन विभाग को प्रस्ताव भेजा है। इसके अनुसार वन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भी भेजा है।

प्रस्तावित बाइपास गंगनकोप्पा, सुत्ता, मणसट्टे, एल. गुड्डेकोप्पा, हेब्बुरुली, होसूर, आडुगोडी गांवों से होकर गुजरेगी। इस क्षेत्र की 18.84 हेक्टेयर वन भूमि में से 2.902 हेक्टेयर एमपीएम (मैसूरु पेपर मिल्स ) की है। इसके अलावा, आरक्षित वन, संरक्षित वन और मानित (डीम्ड) वन होने के बारे में साइट निरीक्षण रिपोर्ट में कहा गया है।

आनन-फानन में काम कराने को आतुर : पर्यावरण कार्यकर्ता अखिलेश चिप्पली ने आरोप लगाया है कि हाईवे निर्माण की आड़ में समृद्ध वनों को काटने का सिलसिला चुपचाप चल रहा है। यह अनावश्यक बाइपास निर्माण कार्य कराकर करोड़ों रुपए लूटने की रणनीति है। बाइपास निर्माण का प्रस्ताव के लिए केंद्र सरकार की हरी झंडी दिखाना बाकी है। हाईवे अथॉरिटी सडक़ चौड़ीकरण के लिए तैयार है और आनन-फानन में काम कराने को आतुर है।

इसलिए जरूरी है बायपास

रिपोर्ट में कहा गया है कि माविनकोप्पा से अडुगोडी तक वर्तमान राजमार्ग मार्ग 30.5 किमी है। इसे पार करने में करीब एक घंटे का समय लगता है। बाइपास के जरिए माविनकोप्पा से अडुगोडी तक सीधा मार्ग उपलब्ध करने से दूरी 13.8 किमी कम हो जाएगी। इसे कवर करने के लिए केवल 15 मिनट ही काफी होंगे।

एक रूट काफी

स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा रूट पर ज्यादा ट्रैफिक नहीं है। ऐसे में बाइपास की क्या जरूरत है, इससे हजारों पेड़ों की बलि चड़ेगी। सैकड़ों हेक्टेयर जंगल नष्ट हो जाएंगे। जिस सडक़ की जरूरत नहीं है, उसके लिए हजारों पेड़ों की बलि देना कितना सही है।

वन विभाग को भेजा प्रस्ताव

माविनकोप्पा आडुगोड़ी तक बाइपास कार्य स्थल निरीक्षण कर वन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद पेड़ों की गणना शुरू होगी।

-निंगप्पा, एईई, राजमार्ग प्राधिकरण, शिवमोग्गा

गबन का संदेह

यह बचकानी बात है कि बाइपास बनने से ट्रैफिक का समय कम हो जाएगा। 13.8 कि.मी. कम करने के लिए 312 करोड़ रुपए खर्च किए जाने से धन के गबन का संदेह पैदा हुआ है।

-अखिलेश चिप्पली, पर्यावरण कार्यकर्ता