
सरकारी कार्यालयों में गंदगी का साम्राज्य
हुब्बल्ली. केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के जरिए पर्यावरण की सफाई को अधिक महत्व दिया है परन्तु राज्य सरकार ने शहर तथा नगर पंचायतों की सफाई की ओर ध्यान नहीं दिया है। इससे गदग जिला कोई अछुता नहीं है।
सार्वजनिक स्थलों पर बेहत परिसर की उम्मीद करना यहां असंभव की बात है।
बस स्टैण्ड की दीवारें गुटका जबाकर थूके धबों से भरी हैं। सडक़ किनारे हर कहीं कचरा फेंककर गंदगी फैलाई गई है। इन सब के अलावा सरकारी कार्यालयों, स्थानीय निकायों में भी सफाई का कोई नामों निशान नहीं है। इस मुद्दे पर विभाग के प्रमुखों की लापरवाही, अधिकारियों, कर्मचारी तथा लोगों में जानकारी की कमी के कारण सफाई कहीं पर भी नजर नहीं आ रही है।
गदग जिलाधिकारी कार्यालय परिसर लगभग साफसुथरा है। सामने स्थित उद्यान को अच्छी तरह रखरखाव किया जा रहा है परन्तु पीछे इस स्तर की सफाई को देखना संभव नहीं है। हर कहीं बिखरा कूड़ा-कचरा, भवनों का मलबा, झाडिय़ां लोगों की शर्मिंदगी का सबब बने हुए हैं।
परिसर से भीतर जाने पर मैदान के फर्श पर पर्याप्त सफाई नजर आ सकती है परन्तु यहां स्थित सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव में और सुधार की जरूरत है। पहली तथा दूसरी मंजिल में सफाई पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है। जिलाधिकारी भवन के भीतरी हिस्से में ही गुटखा, तंबाकू जबाकर थूकने के निशान दीवारों, पेड़ों पर नजर आते हैं। इस पर लगाम कसनी चाहिए।
वहीं गदग, बेटगेरी नगर सभा परिसर का बाहरी नजारा अच्छा ही नजर आता है परन्तु वहां पर भी सफाई की हालत बेहद खस्ता है। यहां के सार्वजनिक शौचालयों की हालत तो बेहद खस्ता है।
लोगों का कहना है कि गदग तहसीलदार कार्यालय, उप विभागीय अधिकारी कार्यालय हर कहीं सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अपने कार्यालयों को ही साफ-सुथरा नहीं रख पाने वाले अधिकारियों से गांवों, शहर की सफाई की उम्मीद करना बेमानी है।
जागरुकता पहुंचाने वाले कार्याल परिसरों में ही सफाई नहीं
स्वच्छ भारत अभियान को साकार बनाने का प्रयास करने वाले तथा जागरुकता पहुंचाने वाले तहसीलदार कार्यालय परिसरनों में ही सफाई का नहीं होना चिड़ाने जैसा है। गजेंद्रगढ़ तहसीलदार कार्यालय परिसर में लोगों, अधिकारियों की आवाजाही की जगह पर मात्र सफाई है। कार्यालय के पीछे, आसपास झाडिय़ां उगी है और हर कहीं कचरा भरा है। नगर सभा परिसर में इससे अलग नहीं है। नगर सभा के पीछे, स्टॉलों के आसपास काटेदार पौधे उगे हैं, खुला शौचालय बना हुआ है। परिसर स्थित शौचालय बदबू से भरा हुआ है। इसके चलते लोग मूत्र विसर्जन के लिए खुले मैदान पर ही निर्भर हैं।
महिला शौचालय नहीं है
नरेगल नगर पंचायत में महिला कर्मचारी व महिला निर्वाचित सदस्य महिला शौचालय की सुविधा नहीं होने से जूझ रही हैं। नगर पंचायत के आसपास सफाई गायब है। उप तहसीलदार कार्यालय, नगर पंचायत कार्यालय, कृषि केंद्र के पीछे लोग खुले में पेशाब करते हैं। इसके अलावा कार्यालय में गुटखा, तंबाकू चबाकर थूकने के दृश्य देखने को मिलते हैं।
साफ-सफाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित
मुंडरगी कस्बे के तहसीलदार कार्यालय सहित कस्बे में संचालित अधिकांश सरकारी कार्यालयों के शौचालय गंदे व बदबूदार हैं। बदबूदार और अस्वच्छ शौचालयों के कारण लोग शौचालयों के बगल में पेशाब करते हैं। इसके चलते शौचालय और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। तहसीलदार कार्यालय परिसर में एक सार्वजनिक मूत्रालय है, जिसका उपयोग केवल आम जनता करती है। यह साफ नहीं होने से लोग मूत्रालय की बाहरी दीवारों के बगल में पेशाब करते हैं। कार्यालय के अंदर कर्मचारियों के लिए अलग शौचालय है जो साफ-सफाई से भी कोसों दूर है।
कागजों तक ही सीमित रह गई शौचमुक्त भारत जैसी योजनाएं
नगर सभा परिसर में एक संकरा शौचालय है और उसके आसपास गंदगी फैली है। तालुक पंचायत परिसर के शौचालयों में पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। वहां जाने वाले लोगों को शौचालय जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। तालुक की अधिकांश ग्राम पंचायतों में शौचालय नहीं हैं। होने पर भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। इसके चलते सरकार की ओर से घोषित स्वच्छ भारत, शौचमुक्त भारत जैसी योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।
सरकारी कार्यालयों में शौचालयों की कमी
शिरहट्टी तालुक के अधिकांश सरकारी कार्यालयों में शौचालय नहीं हैं। नियमित सफाई नहीं होने से इनमें बदबू आ रही है। सरकारी कार्यालय में काम के लिए आने वाले तालुक के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शौचालय के अभाव में परेशानी का सामना कर रहे हैं। कार्यालयों के परिसरों की नियमित सफाई की जा रही है, परन्तु शौचालयों का रखरखाव ही नहीं हो रहा है। तहसीलदार कार्यालय में शौचालय की नियमित सफाई नहीं होने से बदबू फैली है लोग नाक ढककर पेशाब करने को मजबूर हैं। अधिकांश सरकारी कार्यालयों में यही स्थिति है। इसके अलावा अधिकांश कार्यालयों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। इससे महिलाओं को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
नियमित रखरखाव करना चाहिए
जनता का कहना है कि सरकार शौचालयों के निर्माण और रखरखाव के लिए बहुत पैसा जारी कर रही है। कार्यालयों में भी इसके रख-रखाव पर नियमित खर्च हो रहा है, परन्तु काम नहीं हो रहा है। तालुक स्तर पर जिन सरकारी कार्यालयों में शौचालय नहीं है, वहां तत्काल शौचालय का निर्माण करना चाहिए और जिन कार्यालयों में पहले से ही शौचालय हैं, उनका नियमित रखरखाव करना चाहिए।
हर जगह कचरे का ढेर
मौनेशा हादिमनी, शरणु डोद्दमनी, सोमू नागराज जैसे स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि रोण तालुक तहसीलदार कार्यालय के बाहर सूखे कचरे का ढेर है तो परिसर के अंदर हर कहीं कचरे के ढेर के साथ गुटखे के पौच नजर आते हैं। यह सभ्य नागरिकों के लिए शर्मनाक है। कार्यालय परिसर के अंदर और बाहर गुटखा खाने वालों पर जुर्माना लगाने की चेतावनी का बोर्ड दीवार पर चस्पा किया गया है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। कार्यालय में सर्विलांस कैमरा होने के बावजूद अधिकारी व कर्मचारी तंबाकू, गुटखा व सुपारी चबाकर थूकने का नजारा दीवारों नजर आता है। उन पर लगाए गए जुर्माने का कोई उदाहरण नहीं है।
कम से कम एक बार तो सफाई करें
स्थानीय निवासी मुन्ना मुल्ला और अर्जुन कोप्पल का प्रश्न है कि तालुक प्रशासन कार्यालय ही इस तरह के कचरे और गंदगी से भरा पड़ा है तो अन्य कार्यालयों की व्यवस्था कैसी होगी। कुल मिलाकर, तालुक के कुछ कार्यालयों के परिसर में कचरे के ढेर की कोई कमी नहीं है। कार्यालय परिसर में दिन में कम से कम एक बार तो सफाई करनी जाना चाहिए।
सफाई पर ध्यान दिया जाएगा
गजेंद्रगढ़ नए तालुक केंद्र में तहसीलदार कार्यालय के लिए खुद का भवन नहीं है। फिलहाल लोकनिर्माण विभाग के भवन में चला रहे हैं। खुद का भवन निर्माण होने पर विभाग के अनुदान का इस्तेमाल कर सफाई को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसके बावजूद भी सफाई पर ध्यान दिया जाएगा।
-रजनिकांत केंगेरी, तहसीलदार, गजेंद्रगढ़
कार्रवाई की जाएगी
नगर सभा परिसर के गेट की मरम्मत का काम चल रहा है, कुछ लोग नगर निगम परिसर का दुरूपयोग कर रहे हैं। सफाई को लेकर कार्रवाई की जाएगी।
-महांतेश बीलगी,मुख्य अधिकारी, नगर सभा, गजेंद्रगढ़
Published on:
11 Feb 2023 08:50 pm
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