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प्रत्येक कोने में गर्भगृह, तीनों में एक ही आकार के शिवलिंग

बीदर जिला बसवकल्याण तालुक के हल्ली गांव में महादेव मंदिर मूर्तिकला सुंदरता से भरा है। त्रिकोणीय आकार के इस दुर्लभ मंदिर के प्रत्येक कोने पर गर्भगृह और तीनों में शिवलिंग हैं।

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प्रत्येक कोने में गर्भगृह, तीनों में एक ही आकार के शिवलिंग

प्रत्येक कोने में गर्भगृह, तीनों में एक ही आकार के शिवलिंग

मंत्रमुग्ध कर देने वाला त्रिकोण आकार का महादेव मंदिर
इस प्रकार का भारत में एकमात्र मंदिर
हुब्बल्ली.बीदर जिला बसवकल्याण तालुक के हल्ली गांव में महादेव मंदिर मूर्तिकला सुंदरता से भरा है। त्रिकोणीय आकार के इस दुर्लभ मंदिर के प्रत्येक कोने पर गर्भगृह और तीनों में शिवलिंग हैं। गांव के उत्तर में आधा कि.मी. की दूरी पर यह जगह है। बाहर से यह एक घर जैसा दिखाई देता है, परन्तु अंदर प्रवेश करने पर मूर्तिकला वैभव सामने खुल जाता है।

प्रत्येक गर्भगृह का डिजाइन एक जैसा

दक्षिण की ओर एक प्रवेश द्वार है जबकि पूर्व, पश्चिम और दक्षिण की ओर तीन गर्भगृह हैं। प्रत्येक गर्भगृह का डिज़ाइन एक जैसा है। यहां तक कि तीनों में शिव ***** भी एक ही आकार के हैं। पश्चिम की ओर गर्भगृह में शिवलिंग के साथ-साथ महादेव पार्वती की भी मूर्तियां हैं। इसलिए श्रद्धालु इसे महादेव मंदिर के रूप में पहचानते हैं। तीन लिंगों की उपस्थिति के कारण इसका उल्लेख कुछ अभिलेखों में तीनलिंगेश्वर और त्रिकूटा मंदिर के रूप में भी किया गया है। तालुक में मौजूद इस प्रकार की विशेषता वाला यह भारत का एकमात्र मंदिर है।

यहां तक पहुंचने के लिए बनाई है सड़क

बाहर से लाल पत्थर की संरचना है, परन्तु अंदर काले पत्थर के सुंदर नक्काशीदार पत्थर के खंभे हैं। भीतरी दीवार ऐसे ही पत्थर से बनी है। प्रत्येक दीवार पर शिव पार्वती एवं अन्य मूर्तियां स्थापित हैं। श्रावण मास में हर दिन पूजा और अभिषेक किया जाता है। गांव से यहां तक पहुंचने के लिए एक सडक़ भी बनाई गई है।

-सूर्यकांत, स्थानीय निवासी

जीर्णोद्धार की जरूरत

काफ़ी प्रयास से यहां सामुदायिक भवन मंजूर हुआ है और इसकी नींव भी रख दी गई है। स्वागत मेहराब का निर्माण एवं अन्य विकास कार्य करने पर अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा सकता है। उनकी यहां की शिल्पशैली के अनुरूप जीर्णोद्धार कार्य करने की जरूरत है।

-हणमंत पाटिल, प्रमुख

अधिक जानकारी एकत्रित करें

गांव के भीतर 12वीं शताब्दी का शरण हरलय्या का एक मंदिर भी है और संबंधित लोगों को इस और महादेव मंदिर के बारे में शोध कर अधिक जानकारी एकत्रित करनी चाहिए।

-विजयकुमार, स्थानीय निवासी