
मुमुक्षु प्रीतिबेन के पैतृक गांव मारवाड़ के वेलांगरी में निकाला वरघोड़ा।
पूरा वातावरण धर्ममय
गांववासियों ने वरघोड़ा के स्वागत के लिए मार्गों को तोरण-द्वारों से सजाया, रंगोलियां बनाई और श्रद्धाभाव से स्वागत किया। कच्छी घोड़ी, विशाल नगाड़े, बैंड-बाजे, ढोल-थाली और सुंदर धार्मिक झांकियों के साथ निकले वरघोड़ा में महिला-पुरुष हाथों में धर्म ध्वजाएं लेकर जैन धर्म और जैनाचार्यों के जयघोष करते चल रहे थे। पूरा वातावरण धर्ममय और भाव-विभोर नजर आया। इस अवसर पर सांसद लुम्बाराम चौधरी, पूर्व विधायक तारा भंडारी, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष रक्षा भंडारी तथा ग्राम सरपंच करनी बाई भी सहभागी बनी।
19 फरवरी को दीक्षा ग्रहण करेंगी मुमुक्षु प्रीतिबेन
चिकमंगलूरु निवासी मुमुक्षु प्रीतिबेन 19 फरवरी 2026 को आचार्य अभय सुरीश्वर महाराज की निश्रा में सांसारिक भौतिकता और आधुनिक जीवनशैली का त्याग कर आत्मिक शांति व संयम मार्ग को अंगीकार करेंगी। वे साध्वी मोनज्योति को अपना जीवन समर्पित करेंगी। इससे पूर्व बेंगलूरु श्रीसंघ द्वारा नागरिक अभिनंदन के पश्चात, वेलांगरी श्रीसंघ की ओर से भी कस्बे में शोभायात्रा निकालकर मुमुक्षु परिवार को अभिनंदन पत्र सौंपा गया। इस मौके पर वेलांगरी श्रीसंघ के अध्यक्ष सज्जनराज, अशोकभाई, महेंद्रभाई, रूपचंद सहित अनेक गणमान्यजनों ने विचार व्यक्त किए। सांसद लुम्बाराम चौधरी ने कहा कि साधु या साध्वी बनना केवल वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन है। यह सौभाग्य केवल श्रेष्ठ वीर्य को ही प्राप्त होता है।
संयम ही जीवन में दीप जलाता है
जयचंद्र सुरीश्वर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संयम ही वह दीप है, जो जीवन को आलोकित करता है और मानव को मोक्ष पथ की ओर अग्रसर करता है। वैराग्य के बिना संयम संभव नहीं और संयम के बिना आत्मा का कल्याण अधूरा है। उन्होंने मुमुक्षु प्रीतिबेन के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि संसार के लोभ-लालच से ऊपर उठकर लिया गया यह निर्णय अत्यंत दुर्लभ और प्रेरणादायी है। इस अवसर पर गांव के पूर्व जागीरदार ठाकुर लाबुसिंह देवड़ा ने भी चिकमंगलूरु से आए मुमुक्षु परिवार का गांव की ओर से नागरिक अभिनंदन कर उन्हें सम्मानित किया।
Published on:
05 Jan 2026 08:43 pm
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