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नदीं में फेंक रहे हैं अपशिष्ट सामग्री, दूषित हो रही कृष्णा नदी

उत्तरी कर्नाटक की जीवनदायिनी कृष्णा नदी लाखों हेक्टेयर भूमि, लोगों और पशुओं के लिए पानी प्रदान करती है। कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में उगम होकर आंध्र प्रदेश के हंसला देवी में समुद्र में मिलती है।

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नदीं में फेंक रहे हैं अपशिष्ट सामग्री, दूषित हो रही कृष्णा नदी

नदीं में फेंक रहे हैं अपशिष्ट सामग्री, दूषित हो रही कृष्णा नदी

उत्तर कर्नाटक के लोगों को सता रही चिंता
हुब्बल्ली. उत्तरी कर्नाटक की जीवनदायिनी कृष्णा नदी लाखों हेक्टेयर भूमि, लोगों और पशुओं के लिए पानी प्रदान करती है। कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में उगम होकर आंध्र प्रदेश के हंसला देवी में समुद्र में मिलती है।

इस विशाल नदी में महाराष्ट्र में रासायनिक जल मिश्रण, कर्नाटक में भी नदी तट के विभिन्न कारखानों का अपशिष्ट भी नदी में शामिल हो रहा है। इससे जलीय जीवन के लिए खतरा बन रहा है।

अगर ऐसे ही चलता रहा तो हमारा क्या होगा यह चिंता अब उत्तर कर्नाटक भी शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंकली गांव के पास बहने वाली कृष्णा नदी में सांगली जिले की फैक्ट्रियों का गंदा पानी और सांगली शहर का प्रदूषित पानी कृष्णा नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे नदी में जलीय जीवों के मरने की बात हाल ही में सामने आई है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर और सांगली जिलों में कई कारखाने हैं और उनके अपशिष्ट जल को कृष्णा नदी में छोड़ा जा रहा है जिसे उत्तर कर्नाटक की जीवन नदी के रूप में जाना जाता है।

नागरिकों का कहना है कि सांगली के अंकली में मछलियां मर रही हैं और आगे पानी कर्नाटक की ओर बहकर आर रहा है। बेलगावी, विजयपुर, बागलकोट, यादगीर, कलबुरगी, कोप्पल और रायचूर जिलों के अधिकांश शहरी और ग्रामीण लोग इसी कृष्णा नदी जल पर निर्भर हैं। ऐसा प्रदूषित पानी पीकर लोगों और मवेशियों को नुकसान होने पर कौन जिम्मेदार होंगे यह सवाल सार्वजनिक क्षेत्र में उठ रहा है। कर्नाटक सरकार को तुरंत कोल्हापुर और सांगली जिला प्रशासन को इस संबंध में उचित कार्रवाई करने का निर्देश देना चाहिए। आलमट्टी ग्राम पंचायत के अध्यक्ष मंजूनाथ हिरेमठ का कहना है कि कृष्णा नदी के किनारे सैकड़ों मंदिर हैं। मंदिर में आने वाले अधिकांश श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए पवित्र नदी कृष्णा में स्नान कर भगवान के दर्शन करने की प्रथा है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु कृष्ण में पवित्र स्नान कर अपने कपड़े नदी में फेंक देते हैं। इसके अलावा, दूर से हर उगादी, दीवाली जैसे समेत विशेष दिनों में पालकी, छत्री, चामर इस प्रखार देवी-देवताओं के भिन्न वस्तुओं ओं को भी नदी में ही फेकते हैं। इससे जलीय जीवों को भारी परेशानी हो रही है। इतना ही नहीं यह जल प्रदूषण का भी कारण बना हुआ है। इसके चलते समझदार लोग कह रहे हैं कि नदी में कचरा नहीं फेंकना चाहिए।

स्वच्छ कार्यक्रम आयोजित

हम हर साल राज्य सरकारी कर्मचारी संघ योजना शाखा आलमट्टी की ओर से आलमट्टी शास्त्री सागर के बैकवाटर क्षेत्र चंद्रम्मा देवी मंदिर के पास स्वच्छ कार्यक्रम आयोजित कर उस क्षेत्र की सफाई कर आने वाले श्रध्दालुओं के लिए पर्यावरण प्रदूषण के बारे में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते आए हैं।

-सदाशिव दलवई, अध्यक्ष, राज्य सरकारी कर्मचारी संघ, योजना शाखा, आलमट्टी

स्थानीय प्रशासन ने रखे हैं कूड़ेदान
बेलगावी जिले के अंतिम गांव यलगूर के लिए राज्य और अंतर-राज्यों से प्रति दिन श्राध्दालु आकर कृष्ण में स्नान कर यलगूरेशा (एलूर हनुमान) के दर्शन करने आते हैं। उनकी ओर से फेंका जाने वाला कचरा नदी तक न पहुंचे इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने कूड़ेदान रखे हैं। श्रध्दालु अपने कपड़े कूड़ेदान में ही डालते हैं।

-श्याम पात्रद, अध्यक्ष, पीकेपीएस बैंक यलगूर