
up pravartak Naresh Muni Maharaj Janmotsav Programme
सिंधनूर (कर्नाटक). सिंधनूर में चातुर्मास कर रहे उप प्रवर्तक नरेश मुनि के जन्मोत्सव पर उनके अनुयायी एक दिन के लिए साधु बने। उप प्रवर्तक नरेश मुनि का जन्म दिवस भिक्षु दया के प्रकल्प के साथ मनाया। स्थानकवासी, तेरापंथी, मूर्तिपूजक, विष्णु समाज एवं बंगाली समाज भी इस भिक्षु दया का संवाहक बना। जिन्होंने कभी सोचा नहीं होगा उन्हें भी एक दिन के लिए साधु बनने का मौका मिला। जिन्होंने भी भिक्षु दया की उनका आनंद सातवें आसमान पर था। सभी ने साधु जीवन की चर्या, ध्यान, आहार, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण के पक्षों को बारीकी से जाना। समूचा सिन्दूर शहर भक्ति से गुंजायमान हो गया। चारों तरफ जहां नरेश गुरु की मेहर हैं वहां लीला लहर हैं के नाद से गूंज उठा।
उप प्रपर्तक नरेश मुनि ने अपने वक्तव्य में जीवन के अवलोकन की बात कही। उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में माता-पिता और जीवन दाता गुरू के सर्वाधिक उपकार रहा। अगर उन्होंने संभाला नहीं होता तो शायद ये पत्थर ही पत्थर रह जाता। उन्होंने तराशा। डांटा- फटकारा भी। परन्तु सब मेरे हित की कामना से था। गुरु जीवन का शिल्पकार है। जीवन के मालिक है। मुनि ने संघ-समाज के उपकार के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उप प्रपर्तक नरेश मुनि ने कहा कि मैंने मेरी जिन्दगी में क्या खोया, क्या पाया, जिस लक्ष्य को लेकर निकला था। आज मुझे स्व निरीक्षण करने का वक्त है। मुनि ने कहा कि कि लोग माता-पिता गुरु के उपकारों को कैसे भूल जाते हैं। आज लोग बहुत ही स्वार्थी होते जा रहे हैं। संस्कृति को विनष्ट करने वाले लोगों से, मित्रों से बचने की सलाह दी।
गुरु सृष्टि की अनमोल कृति
मुनि शालिभद्र ने कहा कि गुरु जीवन को जीवन नहीं अमृत कलश बना देते हैं। गुरु सृष्टि की सर्वाधिक अनमोल कृति है। गुरु के बिना जीवन की शुरुआत असंभव है। डॉ. दर्शन प्रभा ने कहा कि गुरुदेव नरेश मुनि का जीवन गुणों का गुलदस्ता है। इनका पुण्य लाजवाब है। इनका समर्पण, इनका त्याग बेमिसाल है। इनकी श्रद्धा, इनकी आस्था गजब है। नरेश मुनि श्रवण संघ के सूरज एवं चांद के समान है। साध्वी समृद्धि ने कहा कि इनके जीवन में सबका हित, सबके प्रति मैत्री, सबके मंगल की कामना की भावना निहित है। ये कभी भी प्रतिकूल परिस्थिति में भी अपना धैर्य नहीं खोते। मुनि के प्रति मगनलाल सोलंकी, महेन्द्र सिंघी, छगनलाल भुरट, मीठालाल सोलंकी, सुजीत ओस्तवाल, जवाहरलाल चौपड़ा ने भी भाव व्यक्त किए। सभा का सफल संचालन कार्याध्यक्ष गौतमचन्द बम्ब एवं महावीर संचेती ने किया।
व्यसन मुक्ति का संकल्प
इस अवसर पर बाबूलाल रांका एवं अशोक कुमार रांका परिवार की ओर से प्रभावना रही। इस मौके पर 16 लक्की ड्रॉ भी निकाले गए। मुनि के संपूर्ण जीवन वृन्त को नाटिका के रूप में कन्या मंडल, बाल मंडल ने संपूर्ण भावों के साथ व्यक्त किया। मुनि के सान्निध्य में अब तक सिंधनूर में आठ मासखमण के पच्चक्खाण हो चुके है। तेले, अठाई और बड़ी तपस्याओं के अंबार लग रहे हैं। दर्शनार्थियों, संघों का निरन्तर आवागमन जारी है। मुनि के प्रभाव से सैकड़ों लोगों ने व्यसन मुक्ति का संकल्प लिया है। जैन-जैनतर सभी भावों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
सामूहिक अठाई तप 27 को
आने वाले प्रसंगों में गुरु मरुधर केसरी, गुरु रूप रजत की जन्म जयंती पर सामूहिक अठाई तप का भव्य आयोजन किया जाएगा। जिसका मुख्य कार्यक्रम 27 अगस्त को होगा। दस से बारह वर्ष की आयु के 15 से 20 बच्चे तेले कर रहे हैं। उप प्रवर्तक नरेश मुनि के जन्मोत्सव के मौके सामूहिक भिक्षु दया के कार्यक्रम को लेकर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिंधनूर के अध्यक्ष श्रेणिकराज छाजेड़, कार्याध्यक्ष गौतमचन्द बम्ब, उपाध्यक्ष महावीरचन्द संचेती, मंत्री उदयराज कांकरिया, कोषाध्यक्ष चम्पालाल नाहटा समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
अल्प समय का श्रमण जीवन
परमात्मा की चर्चा से कनेक्शन यानी सामूहिक भिक्षु दया का आयोजन हुआ। भिक्षु दया यानी अल्प समय का श्रमण जीवन और आत्म कल्याण के लिए प्रयास करना। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिंधनूर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम सुबह प्रार्थना के साथ शुरू हुआ। इसके बाद सामूहिक भिक्षुदया के प्रत्याख्यान, सामूहिक स्वाध्याय, मंगल प्रवचन, आहार गवेषणा (मधुकरी), ज्ञानवद्र्धक स्पर्धा, उपकरणों से आए अहोभाव, ज्ञानचर्चा, प्रतिलेखना, गोचरी, प्रतिक्रमण, वीतराग भक्ति एवं संवर हुआ। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन किया। रात्रि भोजन एवं जमींकन्द का त्याग किया। भिक्षा में कोई बीजयुक्त वस्तु, कच्चा सलाद, कंदमूल नहीं लिया। झूठा नहीं छोड़ा। पात्र धोकर पीया।
Published on:
22 Aug 2023 08:38 pm
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