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125 कारीगरों ने 7 साल में बनाई हनुमानजी की 72 फीट ऊंची विशाल मूर्ति

दिन में सोने और रात में दूधिया रोशनी से जगमगाते हैं पितरेश्वर हनुमान  

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पितरेश्वर हनुमान

इंदौर. शहर की सीमा पर विराजे पितरेश्वर हनुमान अपने वृहद आकार के कारण अब दूर—दूर तक जाने जाते हैं। यहां हर दिन, हर समय भक्तों की भीड़ लगी रहती है। पर्वत पर विराजे आकार में विशाल पितृ पर्वत के हनुमानजी भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।

पितृ पर्वत पर विराजित पितरेश्वर हनुमानजी की मूर्ति अनूठी है. यह 108 टन वजनी मूर्ति है जोकि अपनी 72 फीट की ऊंचाई के कारण दूर से ही नजर आ जाती है। इस मूर्ति का निर्माण ग्वालियर के 125 कारीगरों ने 7 साल में किया था। पितृ पर्वत पर स्थापति हनुमानजी की मूर्ति को 264 हिस्सों में बनाया गया। इन हिस्सों को जोड़ने में ही करीब दो साल का समय लगा।

मूर्ति का कुल वजन 108 टन है, जबकि गदा की लंबाई 45 फीट है। इसका वजन 9 टन है और 3 टन की उनकी छतरी है। इस छतरी पर 9 इंच आकार में 108 बार राम नाम लिखा हुआ है। हनुमानजी के हाथ में जो मंजीरे हैं, उनकी लंबाई 11 फीट है। भगवान राम की भक्ति में बैठे हनुमान की इस प्रतिमा के साथ 15 बाय 12 फीट की रामकथा भी तैयार की गई है।

हनुमानजी के चारों ओर 5 हाइमास्ट लेंप लगे हुए हैं। इससे रात में भी यहां पर दिन जैसा दूधिया उजाला रहता है। यहां विशेष दिनों में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन भी होता है। इसके लिए जर्मनी से दो करोड़ की विशेष लेजर लाइट मंगवाई गई थी। पितरेश्वर धाम के व्यवस्थापक बताते हैं कि लेजर लाइट के जरिए हनुमानजी के प्रतिमा के सीने पर 7 रंगों में हनुमान चालीसा का चित्रमय वर्णन दिखाई देता है।