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भगवान महावीर जन्म कल्याणक से जुड़े 16 शुभ स्वप्न 

एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही मंगलकारी घटनाओं के बारे में सोचते हुए निंद्रालीन हुईं तब उन्हें 16 स्वप्नों के दर्शन हुए...

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Shruti Agrawal

Dec 22, 2016

16 dreams of mahavira's mother trishala

16 dreams of mahavira's mother trishala in hindi

भगवान महावीर की माता महारानी त्रिशला एक सर्वगुण संपन्न आदर्श नारी थी। अपनी संवेदनशीलता और मानवीय गुणों के कारण रानी त्रिशला राजा सिद्धार्थ को बेहद प्रिय थीं। इसलिए उनका उपनाम प्रियकारिणी भी प्रसिद्ध हो चुका था। वे विदेहदिण्णा के नाम से भी जानी जाती हैं।

प्रभु माहावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही मंगलकारी घटनाओं के बारे में सोचते हुए निंद्रालीन हुईं तब उन्हें 16 स्वप्नों के दर्शन हुए। स्वप्न देखने के बाद माहारानी बेहद प्रसन्नचित्त थी। लेकिन इन स्वप्नों के उत्तर को जानने का कोतूहल भी था।

जब रानी ने अपने सपनों के बारे में महाराज सिदार्थ को बताया तो वे बेहद प्रसन्न हुए। सिद्धार्थ स्वयं सामुद्रिक शास्त्र के ज्ञाता थे उन्होंने रानी त्रिशला के स्वप्नों का अर्थ कुछ इस प्रकार बताया।


पहला स्वप्न-
स्वप्न में अति विशाल श्वेत हाथी- हमारे घर अद्भुत पुत्र रत्न होगा।

दूसरा स्वप्न
श्वेत वृषभ- पुत्र का जन्म जगत कल्याण करने के लिए ही होगा।

तीसरा स्वप्न
श्वेत वर्ण और लाल आयालों वाला सिंह- पुत्र सिंह की तरह बलशाली होगा।

चौथा स्वप्न
कमलासन लक्ष्मी का अभिषेक करते हुए दो हाथी- देवलोक से देवगण आकर उस पुत्र का अभिषेक करेंगे


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पांचवा स्वप्न-
दो सुंगधित पुष्पमालाएं- वह धर्म तीर्थ स्थापित करेगा और जन-जन द्वारा पूजित होगा।

छटवां स्वप्न-
पूर्ण चंद्रमा- उसके जन्म में तीनों लोक आनंदित होंगे

सातवां स्वप्न-
उदय होता सूर्या- पुत्र सूर्य के समान तेजयुक्त और पापी प्राणियों का उद्धाक होगा।


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आठवां स्वप्न-
कमल पत्रों से ढंके हुए दो स्वर्ण कलश- वह पुत्र अनेक निधियों का स्वामी निधिपति होगा।

नौवां स्वप्न-
कमल सरोवर में क्रीडा करती दो मछलियां- वह पुत्र महाआनंद का दाता, दुखहर्ता होगा

दसवां स्वप्न-
कमलों से भरा जलाशय - एक हजार आठ शुभ लक्षणों से युक्त पुत्र प्राप्त होगा।

ग्यारहवां स्वप्न-
उछलती लहरें- यह पुत्र भूत-भविष्य-वर्तमान का ज्ञाता होगा।
बारहवां स्वप्न-
हीरे-मोती और रत्नजड़ित स्वर्ण सिंहासन- पुत्र राज्य का स्वामी औऱ प्रजा का हितचिंतक होगा।

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तेरहवां स्वप्न-
स्वर्ग का विमान- इस जन्म से पूर्व वह पुत्र स्वर्ग का राजा होगा।

चौदहवां स्वप्न-
पृथ्वी को भेद कर निकलता नागों के राजा नागेंद्र का विमान- वह जन्म से ही त्रिकालदर्शी होगा।

पंद्रहवां स्वप्न -
रत्नों का ढेर- बच्चे में अनंत गुण होंगे। जिन्हें गिना ना सकेगा।

सोलहवां स्वपन्-
धुआंरहित आग- वह पुत्र अपने सभी दायित्वों को निभाकर मोक्ष को प्राप्त होगा।



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