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ये है एकमात्र धनवन्तरि मंदिर, जहां धनतेरस पर डॉक्टरों का लगता है तांता, करते हैं दवाइयां सिद्ध

धनतेरस आज : राज्यवैद्य पंडित लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी ने की थी स्थापना182 साल पुराना अनूठा मंदिर, आज होगी कोरोना को जड़ मिटाने की प्रार्थना

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इंदौर। धनतेरस पर आरोग्य के देव धनवन्तरि के पूजन का खास महत्व है। प्रदेश में एकमात्र और देश के प्रमुख धर्मस्थलों में शामिल धनवन्तरि मंदिर इंदौर के आड़ा बाजार में स्थित है। 182 साल पुराने इस मंदिर में अच्छे स्वास्थ्य की कामना लेकर देशभर से भक्त पहुंचते हैं। धनतेरस पर आयुर्वेदिक सहित सभी पैथी के डॉक्टर दवाइयां मंदिर में लाकर उन्हें सिद्ध कराते हैं।
होलकर स्टेट के राज्यवैद्य दिवंगत लक्ष्मीनारायरण त्रिवेदी ने इस मंदिर की स्थापना की थी।

मंदिर में करीब तीन फीट की भगवान धनवन्तरि की प्रतिमा है। इसके लिए खासतौर से जयपुर से पत्थर बुलाया गया था। धनतेरस पर सुबह साढ़े 9 बजे धनवन्तरि की प्रतिमा का जड़ी-बूटी से अभिषेक और पूजन किया जाएगा। इस उपलक्ष्य के लिए मंदिर में खास सज्जा की जा रही है। इस बार यहां कोरोना को जड़ से मिटाने के लिए विशेष प्रार्थना की जाएगी।

मंदिर स्थापना के पीछे होलकर राजा

पं. मानवेंद्र कुमार त्रिवेदी बताते हैं, होलकर राजा इस्टेट के लोगों की स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते थे। इसके चलते ही उन्होंने राज्यवैद्य को धन्वंतरि की प्रतिमा स्थापित करने के लिए कहा। होलकर राजवंश के समय भी धनतेरस पर इस्टेट और आस-पास के वैद्य यहां आकर जड़ी-बूटियां सिद्ध करते थे। तत्कालीन होलकर शासक भी जब मंदिर के सामने से गुजरते, दर्शन करने जरूर आते थे। देश के 9 प्रमुख धन्वंतरि मंदिरों में इंदौर का भी नाम है। इसके अतिरिक्त 9 अन्य प्रमुख मंदिर दक्षिण भारत में हैं।

अच्छे स्वास्थ्य की करते हैं कामना

त्रिवेदी ने बताया, मान्यता है कि धनतेरस पर गंभीर बीमारी की दवाइयां भगवान धनवन्तरि के सामने रखकर उन्हें सिद्ध करते हैं। इनमें एलोपैथी डॉक्टर भी शामिल रहते हैं। इससे असाध्य रोगों में फायदा मिला है। कोरोना काल में प्रदेशभर के लोगों ने यहां आकर अपने परिजन के स्वास्थ्य की मान की। मान पूरी होने के बाद वे फिर आए और प्रसाद चढ़ाया। इंदौर और आस-पास के कई जिलों से वैद्य जड़ी-बूटियां लेकर उन्हें सिद्ध करने के लिए भगवान धनवन्तरि के चरणों में रखते हैं। यहां आने वाले भक्तों में कई ऐसे भक्त भी शामिल रहते हैं, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।