
demonetisation completed
इंदौर। 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने के फैसले को आज 6 साल पूरे हो गए हैं। नोटबंदीकाल में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति रहा होगा जिसने परेशानी न झेली हो। जानकारों का मानना है, लोग ऑनलाइन या नेट बैंकिंग करने लगे हैं। हालांकि आज भी एटीएम में पहले की तरह कैश ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। कारोबारियों का मानना है कि नोटबंदी का असर अब भी बाजारों में नजर आता है।
नोट बदलवाने 4 घंटे कतार में खड़ा रहा
भंवरकुआं निवासी राकेश पाटीदार बताते हैं, नोटबंदी के समय सबसे बड़ी परेशानी पुराने नोटों को बदलने की थी। मैंने करीब 4 घंटे लंबी कतार में लगकर पुराने नोटों को जमा कराया था। उसके बाद दो हजार रुपए के नए नोट मिले थे। वह दिन आज भी याद है।
शादी में पड़ा था खलल
नेहरू नगर निवासी गोपाल शर्मा के बेटे की शादी के ठीक 10 दिन पहले नोटबंदी लग गई। जिन तैयारियों को लेकर पहले से एडवांस जमा करवाया था, उन्हें आयोजन के बाद भुगतान को लेकर दिक्कत शुरू हो गई। कई लोगों से कर्ज मांगा लेकिन 500 व 1000 के नोट बंद होने से कर्ज भी नहीं मिला। स्थिति को देखते हुए सीमित लोगों में ही बेटे की शादी करनी पड़ी।
लेन-देन में वित्तिय अनुशासन
सीए पंकज शाह का कहना है कि 8 नवंबर 2016 को अचानक नोटबंदी की घोषणा हुई और 500 व एक हजार के नोट बंद कर दिए गए। नोटबंदी देश के लिए एक बहुत बड़ा कदम था। शुरुआती दिनों में आम और खास हर व्यक्ति ने कुछ न कुछ परेशानियां झेलीं। खासतौर से ऐसे सेक्टर को काफी कठिनाई से गुजरना पड़ा, जिनमें बड़ा व्यवहार नकद से ही होता था। जैसे कि ज्वेलर्स, रीयल एस्टेट, स्टाम्प वेंडर और कियोस्क आदि। कई किसान भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए थे। अहम बात यह थी कि उस समय बहुत कम लोग डिजिटल बैंकिंग पर भरोसा करते थे। पेटीएम विकल्प बना और इसके बाद ट्रांजेक्शन के और कई विकल्प मिलते चले गए।
ठेले से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक में ऑनलाइन लेन-देन
नोटबंदी का दूरगामी परिणाम यह रहा कि अब लेन-देन में वित्तिय अनुशासन नजर आने लगा है। ठेले से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक में ऑनलाइन लेन-देन होने लगा है। नोटबंदी के बाद बैंकों में ढाई लाख रुपए से ज्यादा नकद जमा करने वालों को सामान्य इन्क्वायरी से गुजरना पड़ा है। कई को नोटिस मिले और कार्रवाई तक हुई। कालेधन पर लगाम कसने के लिए नोटबंदी के साथ आए कठोर प्रावधान अब तक नहीं हटे। इसमें सबसे बड़ा प्रावधान अघोषित कमाई पर 77 फीसदी की दर से लगने वाला टैक्स है। कई संगठन लगातार इस टैक्स को हटाने की मांग कर रहे हैं। अब बाजार में नकद के साथ-साथ डिजीटल लेनदेन्र चलन में है, इसलिए दोनों के संतुलन के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है।
Published on:
08 Nov 2022 01:32 pm
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